19 अक्टूबर को भारतीय बाजार सपाट खुलने की तैयारी में हैं। DIIs ने **₹3,661 करोड़** की बिकवाली कर **45** दिनों का अपना खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया है, जबकि FIIs **15** सत्रों बाद नेट बायर बने हैं।
भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए आज का दिन मिला-जुला रहने वाला है। मार्केट सेंटिमेंट पर इस समय संस्थागत निवेशकों के निवेश पैटर्न में आए बड़े बदलाव का असर साफ दिख रहा है। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने पिछले सेशन में ₹3,661 करोड़ के शेयर बेचकर 45 दिनों से जारी अपनी खरीदारी की लकीर को खत्म कर दिया है।
इसके उलट, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने राहत की सांस लेते हुए मार्केट में वापसी की है और ₹1,166 करोड़ का निवेश किया है। यह 15 दिनों के लगातार बिकवाली वाले दौर के बाद एक बड़ा बदलाव है। दोनों बड़े प्लेयर्स के अलग-अलग रुख के चलते बाजार की शॉर्ट-टर्म दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ग्लोबल मार्केट का मूड
ग्लोबल स्तर पर भी माहौल काफी सतर्क है। अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी लागत और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंताएं हावी हैं। इन ग्लोबल फैक्टर्स और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर GIFT Nifty पर दिख रहा है, जिससे बाजार की शुरुआत सुस्त रहने के आसार हैं।
कमोडिटी अपडेट
क्रूड ऑयल के मोर्चे पर राहत है, जहाँ ब्रेंट क्रूड $108.43 प्रति बैरल पर आ गया है, जो भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए एक पॉजिटिव संकेत है। वहीं, गोल्ड की कीमतें $4,180 प्रति औंस के आसपास स्थिर हैं। निवेशक अब फेडरल रिजर्व की आगामी मीटिंग का इंतजार कर रहे हैं, ताकि ब्याज दरों पर कोई स्पष्ट संकेत मिल सके।
निवेशकों के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती यह देखना होगी कि क्या FIIs की यह खरीदारी महज एक दिन का इत्तेफाक है या किसी नए ट्रेंड की शुरुआत। संस्थागत निवेश के इन आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यही तय करेगा कि बड़े खिलाड़ी ग्लोबल वोलेटिलिटी के बीच खुद को कैसे पोजीशन कर रहे हैं।
