16 सितंबर को भारतीय बाजारों में रिकवरी देखने को मिली। Nifty **23,217** पर बंद हुआ। घरेलू निवेशकों (DIIs) ने **₹3,908 करोड़** के शेयर खरीदे, जिससे विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के बावजूद बाजार संभला रहा।
16 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी का दौर रहा, जहाँ घरेलू निवेशकों की ताकत ने विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच इंडेक्स को सहारा दिया। निफ्टी 50 (Nifty 50) 99 अंक चढ़कर 23,217.60 पर बंद हुआ, वहीं बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 332.63 अंक बढ़कर 74,336.45 पर पहुंच गया। यह स्थिति मार्केट में इंस्टिट्यूशनल डायवर्जेंस को दर्शाती है, जहाँ लोकल फंड्स बाजार के लिए एक सुरक्षा कवच बने हुए हैं।
डीआईआई का सहारा
घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस सत्र के दौरान मुख्य भूमिका निभाई और ₹3,908.23 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। सितंबर महीने में अब तक घरेलू निवेशकों की कुल खरीदारी ₹31,581.24 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इसके विपरीत, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बिकवाली जारी रखते हुए ₹2,032.61 करोड़ के शेयर बेचे। इसके साथ ही, सितंबर में FIIs की कुल शुद्ध बिकवाली ₹4,400 करोड़ के पार निकल गई है।
एफआईआई क्यों बेच रहे हैं?
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे मुख्य वजह ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक चिंताएं हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury yields) में उछाल के कारण निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर देख रहे हैं। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट को बढ़ावा दिया है।
बाजार का आउटलुक
आज की तेजी बैंकिंग, एफएमसीजी (FMCG) और ऑटो सेक्टर के दिग्गज शेयरों के दम पर आई। दूसरी ओर, आईटी (IT) सेक्टर में प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। अब निवेशकों की नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की अगली पॉलिसी मीटिंग पर हैं। फेड चेयरमैन के ब्याज दरों को लेकर संकेत तय करेंगे कि बाजार में लिक्विडिटी का फ्लो कैसा रहेगा। फिलहाल, घरेलू कैपिटल का प्रवाह बाजार को एक बड़ी गिरावट से बचाने का काम कर रहा है।
