गुड़ी पड़वा पर भी शेयर बाजार खुला, पर कहां रहेगी छुट्टी?
19 मार्च, 2026 को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन कई बैंक बंद रहेंगे, लेकिन भारतीय शेयर बाजार, जिसमें बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) शामिल हैं, सामान्य कामकाज जारी रखेंगे। इक्विटी, कैश और इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में सुबह 9:15 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक ट्रेडिंग होगी। यह फैसला ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए लिया गया है।
कौन से सेगमेंट्स रहेंगे बंद?
हालांकि, बैंकिंग से जुड़े कुछ खास सेगमेंट्स में ट्रेडिंग नहीं होगी। इनमें करेंसी डेरिवेटिव्स (Currency Derivatives), NDS-RST (सरकारी सिक्योरिटीज के लिए एक सेटलमेंट सिस्टम) और ट्राइ-पार्टी रेपो ट्रेडिंग (Tri-party Repo Trading) शामिल हैं। इसका कारण यह है कि इस दिन बैंक हॉलिडे है। अच्छी खबर यह है कि कमोडिटी डेरिवेटिव्स (Commodity Derivatives) और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (Electronic Gold Receipts) में ट्रेडिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा और ये सामान्य रूप से जारी रहेंगी। यह एक सुनियोजित व्यवस्था है जो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से अलग करती है।
पिछले साल कैसा रहा था गुड़ी पड़वा?
पिछले साल, 19 मार्च 2025 को गुड़ी पड़वा के दिन, बाजार में तेजी का माहौल था। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों हरे निशान में बंद हुए थे। स्मॉल और मिड-कैप शेयरों ने खासकर अच्छा प्रदर्शन किया था, जिनमें 2.63% तक की उछाल देखी गई थी। उस समय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते सोने के भाव भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे।
भारत की आर्थिक सेहत और आगे का नज़रिया
भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत दिख रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ 6.4% से 7.4% के बीच रहने का अनुमान है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए 2025 की शुरुआत में ब्याज दरों में कटौती की है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी (demographics) के फायदों को देखते हुए, विश्लेषक लंबी अवधि के लिए आशावादी बने हुए हैं।
बाजार के लिए क्या हैं जोखिम?
बाजार भले ही खुले हों, लेकिन कुछ जोखिम बने हुए हैं। बैंकिंग से जुड़े सेगमेंट्स में आंशिक अवकाश के कारण कुछ इंस्ट्रूमेंट्स के लिए लिक्विडिटी (liquidity) में थोड़ी कमी या सेटलमेंट में देरी की संभावना है। इसके अलावा, वैश्विक अनिश्चितताएं, शेयर बाजारों में मौजूदा वैल्यूएशन्स का स्तर और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) द्वारा पैसे निकालने का खतरा भी बना हुआ है।
