Nifty 50 और Sensex में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बढ़ते US बॉन्ड यील्ड और FII की बिकवाली के बीच, अगले हफ्ते **20** नए IPO आने वाले हैं, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी का बड़ा टेस्ट होने जा रहा है।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है, जो लगातार 6 हफ्तों की गिरावट में तब्दील हो चुका है। Nifty 50 और BSE Sensex अपने अगस्त के उच्चतम स्तरों से नीचे आ चुके हैं। बाजार की इस सुस्ती की मुख्य वजह देश के कॉर्पोरेट नतीजों से ज्यादा ग्लोबल अनिश्चितता है।
ग्लोबल फैक्टर्स का दबाव
मार्केट पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संकेतों से है। खास तौर पर US बॉन्ड यील्ड का 5% के करीब रहना निवेशकों को परेशान कर रहा है। जब सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, तो ग्लोबल निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स जैसे भारत से पैसा निकालकर वहां शिफ्ट कर देते हैं। इस वजह से Foreign Institutional Investors (FIIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं। हालांकि Domestic Institutional Investors (DIIs) बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विदेशी फंड्स की निकासी के आगे यह नाकाफी साबित हो रहा है।
सेक्टर का हाल और डिफेंसिव रणनीति
वोलेटिलिटी के बीच निवेशक अब डिफेंसिव सेक्टर की ओर भाग रहे हैं। हेल्थकेयर और FMCG जैसे सेक्टर अब भी बेहतर स्थिति में हैं क्योंकि इनकी डिमांड हमेशा बनी रहती है। वहीं, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर दबाव बढ़ा है। आईटी कंपनियां ग्लोबल क्लाइंट्स के खर्च कम करने से जूझ रही हैं, तो कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट में महंगाई के कारण लोगों ने खर्च में कटौती शुरू कर दी है।
IPO का बोझ और लिक्विडिटी का टेस्ट
बाजार की खराब चाल के बावजूद प्राइमरी मार्केट में हलचल तेज है। अगले हफ्ते 20 नए पब्लिक इश्यू (IPO) आने की उम्मीद है, जिसमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित डेब्यू भी शामिल है। इतनी बड़ी संख्या में IPO आने से लिक्विडिटी का संकट खड़ा हो सकता है, क्योंकि निवेशक सेकेंडरी मार्केट से पैसा निकालकर नए IPOs में लगाने की कोशिश करेंगे, जिससे मौजूदा शेयरों पर और दबाव बन सकता है।
आने वाले दिनों में US-China समिट के नतीजे और फ्लैश PMI डेटा पर सबकी नजरें टिकी होंगी, जो तय करेंगे कि मार्केट में गिरावट का यह दौर थमेगा या और लंबा खिंचेगा।
