भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता भी निराशाजनक रहा। लगातार तीसरे हफ्ते बाजार लाल निशान में बंद हुआ है और Nifty 50 गिरकर **24,175.65** के स्तर पर आ गया है। इस गिरावट के पीछे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा की गई भारी बिकवाली है।
भारतीय शेयर बाजारों के लिए पिछले पांच महीनों का यह सबसे लंबा गिरावट का दौर रहा है। बेंचमार्क इंडेक्स Nifty 50 में 0.31% की कमजोरी आई और यह 24,175.65 पर बंद हुआ, जबकि BSE Sensex लगभग 0.36% फिसलकर 77,264.51 पर आ गया।
FIIs vs DIIs: किसका पलड़ा भारी?
बाजार में जारी बिकवाली के मुख्य विलेन विदेशी निवेशक रहे हैं, जिन्होंने सप्ताह के दौरान ₹20,260 करोड़ के शेयर बाजार से बाहर निकाले हैं। हालांकि, भारतीय बाजार को पूरी तरह गिरने से घरेलू निवेशकों (DIIs) ने बचाया। DIIs ने ₹19,309.93 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को एक सपोर्ट (Floor) देने की कोशिश की है।
सेक्टर का हाल और रोटेशन
बाजार में एक तरफा बिकवाली नहीं है, बल्कि निवेशक अपना पैसा एक सेक्टर से निकालकर दूसरे में डाल रहे हैं। IT और मेटल सेक्टर में मजबूती दिखी है, जहां Nifty IT इंडेक्स करीब 2.45% ऊपर चढ़ा है। वहीं, दूसरी ओर FMCG और ऑयल एंड गैस जैसे डिफेंसिव सेक्टरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली की है।
रिस्क फैक्टर्स पर नजर
मार्केट अभी भी सतर्क मोड में है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- ग्लोबल संकेत: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और महंगाई को लेकर सख्त रुख उभरते बाजारों के लिए दबाव बना रहा है।
- जियोपॉलिटिकल तनाव: मिडिल ईस्ट में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर चिंताएं कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर असर डाल सकती हैं, जो सीधे तौर पर महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं।
आगे की राह
तकनीकी चार्ट्स के मुताबिक, मार्केट अभी 'ओवरसोल्ड' (Oversold) स्थिति में है, यानी कई शेयर अपने 20-डे सिंपल मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रहे हैं। भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 32 पैसे मजबूत होकर 95.38 पर बंद हुआ है। अब बाजार की रिकवरी पूरी तरह से FIIs की बिकवाली रुकने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति लौटने पर निर्भर करेगी।
