भारतीय शेयर बाजार में आज एक दिलचस्प तस्वीर देखने को मिल रही है। जहाँ बड़े बेंचमार्क इंडेक्स दबाव में हैं, वहीं Nifty Smallcap 100 इंडेक्स **20,187.80** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। बाजार की यह दिशा विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच चल रहे 'टग-ऑफ-वार' से तय हो रही है।
संस्थागत निवेशकों की जंग
बाजार में जारी यह उठा-पटक विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच चल रही खींचतान का नतीजा है। विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FIIs लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिन्होंने पिछले एक हफ्ते में ₹5,611.94 करोड़ के शेयर बेचे हैं। इस भारी आउटफ्लो के चलते BSE लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹4.5 लाख करोड़ तक घट गया है।
वहीं दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs बाजार को सहारा दे रहे हैं। उन्होंने बाजार में ₹23,156.38 करोड़ का निवेश किया है, जिससे बड़े शेयर्स में भारी गिरावट रुक गई है और स्मॉल-कैप सेगमेंट में तेजी बरकरार है।
सेक्टर का हाल और टेक्निकल मोर्चे
सेक्टोरल इंडेक्स में भी बिखराव साफ है। Nifty Auto में 4% की गिरावट दिखी, जबकि कंज्यूमर ड्युरेबल्स 2.6% नीचे फिसले। इसके अलावा हेल्थकेयर, मीडिया और FMCG सेक्टर में भी 2% के करीब सुस्ती रही। वहीं, दूसरी ओर Nifty Oil & Gas इंडेक्स 1% की बढ़त बनाने में कामयाब रहा, जो दिखाता है कि निवेशक सेक्टर रोटेशन (Sector Rotation) कर रहे हैं।
टेक्निकल तौर पर देखें तो Nifty 50 फिलहाल 24,000 के लेवल को पार करने में संघर्ष कर रहा है। इंडेक्स अभी अपने 50-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है। बाजार में रिकवरी के लिए 24,080 के स्तर के ऊपर टिकना जरूरी है। वहीं, नीचे की तरफ 23,700 एक मजबूत सपोर्ट है, जिसे तोड़ने पर बाजार में बिकवाली और बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या DIIs की खरीदारी की रफ्तार बनी रहेगी? यदि घरेलू निवेशकों का जोश कम होता है, तो बेंचमार्क इंडेक्स पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, स्मॉल-कैप में अब मुनाफावसूली का दौर आ सकता है, इसलिए निवेशकों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है।
