Indian Equity Fundraising: सात महीनों में **₹3 लाख करोड़** पार, प्राइमरी मार्केट में दिखा कंपनियों का जोश

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Equity Fundraising: सात महीनों में **₹3 लाख करोड़** पार, प्राइमरी मार्केट में दिखा कंपनियों का जोश

साल 2026 के शुरुआती 7 महीनों में भारतीय कंपनियों ने इक्विटी के जरिए **₹3.04 लाख करोड़** जुटाए हैं। खास बात यह है कि इस बार IPO के बजाय प्रिफरेंशियल इश्यू और QIP पर जोर रहा है, जबकि दूसरी ओर सेकेंडरी मार्केट में इंडेक्स **7%** से ज्यादा गिरे हैं।

साल 2026 के शुरुआती सात महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट में पूंजी जुटाने की एक बड़ी लहर देखी गई है। जनवरी से जुलाई के बीच कंपनियों ने कुल ₹3.04 लाख करोड़ की राशि जुटाई है। पिछले साल जहां बाजार में IPO का दबदबा था, वहीं इस साल कंपनियां प्रिफरेंशियल इश्यू और क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) जैसे रूट को प्राथमिकता दे रही हैं।

फंड जुटाने का नया ट्रेंड

इस दौरान प्रिफरेंशियल इश्यू सबसे बड़ा जरिया बनकर उभरे हैं, जिनसे कुल ₹1.77 लाख करोड़ जुटाए गए, जो कुल राशि का लगभग 58% है। इसके अलावा QIP के जरिए ₹47,881 करोड़ आए हैं। जुलाई का महीना इसमें सबसे शानदार रहा, जिसमें मंथ-ऑन-मंथ 163% की उछाल के साथ ₹1.1 लाख करोड़ की फंड जुटाने की प्रक्रिया पूरी हुई। ये तरीके IPO के मुकाबले तेज हैं और इनमें रेगुलेटरी औपचारिकताएं भी कम होती हैं।

सेकेंडरी मार्केट का हाल

प्राइमरी मार्केट की इस चमक-धमक के विपरीत, सेकेंडरी मार्केट का हाल थोड़ा सुस्त है। निफ्टी 50 (Nifty 50) जैसे बेंचमार्क इंडेक्स साल 2026 में दबाव में हैं और अगस्त के अंत तक इनमें 7.36% के करीब गिरावट आ चुकी है। हालांकि, जुलाई में आए करीब 85% IPO अपने इश्यू प्राइस के ऊपर या बराबर लिस्ट हुए, जो नई लिस्टिंग के प्रति निवेशकों के उत्साह को दर्शाता है।

कौन है इस तेजी के पीछे?

इस पूरे पूंजी प्रवाह को भारतीय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का भरपूर समर्थन मिल रहा है, जो लगातार मार्केट में खरीदारी कर रहे हैं। वहीं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) इस साल अस्थिर रहे हैं और नेट सेलर की भूमिका में दिखे हैं। फिलहाल, घरेलू पैसा ही भारतीय बाजार के वैल्यूएशन को संभालने का काम कर रहा है।

निवेशकों के लिए समझने वाली बात यह है कि प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट अब अलग राह पर चलते दिख रहे हैं। कंपनियां अपने विस्तार के लिए फंड जुटा रही हैं, लेकिन बाजार अभी भी ग्लोबल संकेतों और अमेरिकी टैरिफ जैसी चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.