Samvat 2083: भारतीय बाजार की कठिन शुरुआत, रेट हाइक और टैक्स के मोर्चे पर बड़ी चुनौती

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AuthorNeha Patil|Published at:
Samvat 2083: भारतीय बाजार की कठिन शुरुआत, रेट हाइक और टैक्स के मोर्चे पर बड़ी चुनौती

भारतीय बाजार 8 नवंबर 2026 को मुहूर्त ट्रेडिंग के साथ नए संवत 2083 में प्रवेश करने जा रहे हैं। पिछले एक साल में इंडेक्स में 8-12% की गिरावट और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच अब निवेशकों की नजर आरबीआई के फैसलों और टैक्स नीति में बदलाव पर टिकी है।

भारतीय शेयर बाजार के लिए संवत 2082 काफी चुनौतीपूर्ण रहा। बेंचमार्क इंडेक्स Nifty और Sensex में पिछले साल 8% से 12% की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की गई भारी बिकवाली रही, जो साल 2026 में $28 बिलियन से $31 बिलियन के स्तर तक पहुंच गई थी।

नीतिगत बदलावों की उम्मीद

बाजार की नजर अब सरकार की टैक्स नीतियों पर है, खासकर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के मोर्चे पर। चर्चा है कि बाजार की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव रखा है।

महंगाई और आरबीआई का रुख

सितंबर 2026 में महंगाई दर 5.54% पर पहुंच गई, जिसके दिसंबर तिमाही में 6.3% तक जाने का अनुमान है। इस बढ़ती महंगाई ने RBI की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अक्टूबर में रेपो रेट 5.50% पर है और जानकारों का मानना है कि दिसंबर की पॉलिसी मीटिंग में आरबीआई महंगाई पर लगाम लगाने के लिए 25 से 50 बेसिस पॉइंट तक ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

विदेशी दबाव और ग्लोबल संकट

रुपया डॉलर के मुकाबले ₹95 के करीब कमजोर पड़ा है। साथ ही, पश्चिम एशिया में चल रही भू-राजनीतिक अस्थिरता कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को प्रभावित कर रही है, जिससे व्यापार घाटे और घरेलू बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। संवत 2083 में बाजार की दिशा पूरी तरह से राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों (Fiscal and Monetary Policies) पर निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.