बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले ने PIB फैक्ट-चेक यूनिट (FCU) की कानूनी शक्तियों को रद्द कर दिया है। इसके बाद, भारत सरकार अब ऑनलाइन गलत सूचनाओं से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स विकसित कर रही है। सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील कर रही है, लेकिन यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए बदलते नियमों की ओर इशारा करता है।
कोर्ट के फैसले से बदली चाल
भारतीय सरकार ऑनलाइन गलत सूचनाओं (Misinformation) से निपटने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रही है। यह तब हो रहा है जब सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट-चेक यूनिट (PIB FCU) को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने IT रूल्स के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिससे PIB FCU को सरकारी सूचनाओं से जुड़े कंटेंट को पहचानने और डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटवाने की शक्ति मिलने वाली थी। यह फैसला मार्च 2024 की उस नोटिफिकेशन को अमान्य करता है, जिसके तहत यह यूनिट काम कर रही थी।
AI पर क्यों बढ़ रहा है जोर?
मंत्रालय का कहना है कि मैनुअल तरीके से जांच और सामान्य ओपन-सोर्स टूल्स से ऑनलाइन जानकारी के भारी बोलबाले से निपटना मुश्किल हो रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए, मंत्रालय नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन के साथ मिलकर एक AI-पावर्ड चैटबॉट बना रहा है। यह चैटबॉट रियल-टाइम में दावों की सच्चाई का पता लगाएगा। इसके अलावा, सरकार एक ऐसा ऑटोमेटेड सिस्टम भी तैयार कर रही है जो तुरंत मैनिपुलेटेड कंटेंट का पता लगा सके। यह मैनुअल प्रक्रिया की तुलना में फैक्ट-चेकिंग को काफी तेज और कुशल बनाएगा।
रेगुलेटरी और इन्वेस्टर के लिए मायने
हालांकि PIB FCU एक सरकारी इकाई है, लेकिन इस नीतिगत बदलाव का डिजिटल इकोनॉमी पर बड़ा असर पड़ेगा। ऑनलाइन इंटरमीडियरी के तौर पर काम करने वाली कंपनियों को अपनी कानूनी सुरक्षा बनाए रखने के लिए सख्त 'ड्यू डिलिजेंस' का पालन करना होगा। जैसे-जैसे सरकार AI-संचालित तरीकों की ओर बढ़ रही है, डिजिटल प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी फर्मों के लिए कंप्लायंस की जरूरतें बदल सकती हैं।
कानूनी दांव-पेंच और आगे की राह
सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, और दिल्ली हाई कोर्ट में भी ऐसे ही मामले विचाराधीन हैं। PIB FCU की वैधानिक स्थिति पर अनिश्चितता के बावजूद, मंत्रालय मौजूदा कानूनों के तहत ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी कर रहा है। इसमें 'भारतीय न्याय संहिता' के वे प्रावधान भी शामिल हैं जो सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता से जुड़ी गलत सूचनाओं से निपटते हैं। मीडिया संगठनों और पत्रकारों पर भी मान्यता नियमों का असर रहेगा, जिसमें झूठी जानकारी देने पर डिबारमेंट का प्रावधान है। इसके अलावा, मंत्रालय प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ मिलकर प्रेस काउंसिल एक्ट में संभावित संशोधनों पर भी चर्चा कर रहा है, जो मीडिया परिदृश्य के लिए एक नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क का संकेत देता है।
निवेशकों और बाजार के लिए यह देखना अहम होगा कि सरकार कैसे इन AI-संचालित जांच प्रणालियों को फ्री स्पीच के न्यायिक संरक्षण के साथ संतुलित करती है। सुप्रीम कोर्ट का PIB FCU पर रुख और कंटेंट के लिए किसी कॉमन कोड पर नए दिशानिर्देश, भारत में डिजिटल व्यवसायों के लिए कंप्लायंस के माहौल को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
