BIS Certification: हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बड़ी राहत, सरकार इन उपकरणों को देगी छूट

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AuthorNeha Patil|Published at:
BIS Certification: हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बड़ी राहत, सरकार इन उपकरणों को देगी छूट

सेमीकंडक्टर और AI क्षेत्र में उत्पादन को रफ्तार देने के लिए सरकार अब हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग मशीनों को अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन से छूट देने की योजना बना रही है। इस कदम से कीमती मशीनों के आयात में होने वाली देरी कम होगी।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग उपकरणों को 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स' (BIS) के कड़े नियमों से मुक्त करने का नया फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने टोक्यो दौरे के दौरान इस पहल की घोषणा की, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी मशीनों के इंपोर्ट प्रोसेस को आसान बनाना है।

रेगुलेटरी बाधाएं होंगी दूर

अब तक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने वाली कंपनियों को हाई-एंड मशीनों के लिए लंबी क्लीयरेंस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अनिवार्य गुणवत्ता परीक्षण के चलते लॉजिस्टिक्स और इंस्टॉलेशन में देरी होती थी, जिससे प्रोजेक्ट शुरू होने का समय बढ़ जाता था। सरकार के इस नए नियम से ग्लोबल स्टैंडर्ड वाली मशीनों को बार-बार घरेलू टेस्टिंग से नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे सप्लाई चेन में आ रही रुकावटें दूर होंगी।

सेमीकंडक्टर लक्ष्य और निवेश

भारत का लक्ष्य 2032 तक सेमीकंडक्टर डिमांड को $150 बिलियन तक पहुंचाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार विदेशी निवेश आकर्षित करने के साथ ही एक सरल रेगुलेटरी एनवायरमेंट बनाना चाहती है। सर्टिफिकेशन में छूट के अलावा, मंत्रालय स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) से जुड़े नियमों की भी समीक्षा कर रहा है।

फिलहाल यह ड्राफ्टिंग स्टेज पर है और मार्केट एक्सपर्ट्स को आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन का इंतजार है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये बदलाव कितनी तेजी से लागू होते हैं और इससे नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के 'टाइम-टू-मार्केट' पर कितना असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.