भारत और Mauritius के बीच टैक्स संधि में अब 'Principal Purpose Test' (PPT) लागू कर दिया गया है। इसके तहत अगर किसी ट्रांजेक्शन का मुख्य मकसद सिर्फ टैक्स बचाना है, तो अथॉरिटीज टैक्स लाभ देने से इनकार कर सकती हैं।
भारत सरकार ने Mauritius के साथ अपनी 'Double Taxation Avoidance Agreement' (DTAA) में बड़ा बदलाव किया है। अब नई शर्तों के तहत, टैक्स छूट का फायदा तभी मिलेगा जब निवेश का उद्देश्य स्पष्ट रूप से व्यावसायिक होगा, न कि सिर्फ टैक्स से बचने का जरिया। यह कदम वैश्विक मानकों (OECD) के साथ तालमेल बिठाने की दिशा में उठाया गया है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?\n\nपहले सिर्फ 'Tax Residency Certificate' दिखा देना ही टैक्स लाभ लेने के लिए काफी होता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब निवेशकों को यह साबित करना होगा कि उनके निवेश के पीछे असली 'Commercial Substance' है। इससे उन विदेशी फंड्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो केवल टैक्स बचाने के लिए Mauritius रूट का इस्तेमाल करते थे।\n\n### कब से लागू होगा नियम?\n\nCentral Board of Direct Taxes (CBDT) ने स्पष्ट किया है कि यह टेस्ट पुरानी डील्स पर नहीं, बल्कि नए ट्रांजेक्शंस पर लागू होगा। हालांकि, अभी भी इंडस्ट्री इस बात को लेकर सतर्क है कि टैक्स अधिकारी इन नियमों की व्याख्या (interpretation) कैसे करेंगे। \n\nअभी मार्केट की नजरें सरकार द्वारा जारी होने वाले उन गाइडलाइन्स और सर्कुलर्स पर हैं, जो यह साफ करेंगे कि ग्राउंड लेवल पर इस 'Principal Purpose Test' का इम्प्लीमेंटेशन कैसे होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विदेशी फंड्स अब दूसरे रूट्स की तरफ रुख करते हैं या अपनी ऑपरेशनल स्ट्रक्चर को और मजबूत बनाते हैं।
