1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले नए कंज्यूमर प्रोटेक्शन नियमों के तहत, ई-कॉमर्स कंपनियों को अब पिछले **30 दिनों** की सबसे कम कीमत के आधार पर ही डिस्काउंट दिखाना होगा।
भारत सरकार ने ई-कॉमर्स सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होने वाले कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) अमेंडमेंट रूल्स के तहत, कंपनियों को अब 'स्ट्राइक-थ्रू' प्राइसिंग (जहां पुरानी कीमत को काटकर नया डिस्काउंट दिया जाता है) के खेल को सीमित करना होगा। अब किसी भी ऑफर के लिए 'रेफरेंस प्राइस' वही होगा जो पिछले 30 दिनों में उस प्रोडक्ट की सबसे कम कीमत रही हो।
कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
यह केवल मार्केटिंग का बदलाव नहीं है, बल्कि एक तकनीकी और ऑपरेशनल जटिलता भी है। ब्रांड्स को अब अपने हर SKU (स्टॉक कीपिंग यूनिट) का सटीक रिकॉर्ड रखना होगा। इसमें लॉयल्टी ऑफर और रीजनल डिस्काउंट्स का हिसाब रखना भी अनिवार्य होगा। जो कंपनियां इन नियमों का पालन करने में विफल रहेंगी, उन्हें सरकारी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
निवेशकों को अब रिटेल कंपनियों के यूनिट इकोनॉमिक्स पर नजर रखनी चाहिए। अब तक कई D2C ब्रांड्स आक्रामक डिस्काउंट देकर मार्केट शेयर बढ़ाने की कोशिश में थे, जिससे मार्जिन पर दबाव रहता था। नए नियम कंपनियों को ब्रांड लॉयल्टी और प्रोडक्ट क्वालिटी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर करेंगे। हालांकि, शुरुआती दौर में कंपनियों का कंप्लायंस खर्च बढ़ सकता है, जिससे शॉर्ट-टर्म मार्जिन पर असर पड़ सकता है। आने वाले समय में रिटेल कंपनियों के अर्निंग्स कॉल में मैनेजमेंट की कमेंट्री यह साफ करेगी कि वे अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी को कैसे बदल रहे हैं।
