Directorate General for Trade Remedies (DGTR) ने 7 चीनी प्रोडक्ट्स की जांच शुरू कर दी है। इसमें जरूरी फार्मा इंग्रीडिएंट्स भी शामिल हैं, ताकि घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को सस्ती चीनी कीमतों से बचाया जा सके।
भारतीय रेगुलेटर DGTR ने घरेलू कंपनियों की चिंताओं को देखते हुए चीन से आने वाले 7 प्रमुख प्रोडक्ट्स की जांच शुरू कर दी है। इनमें पेनिसिलिन जी (Penicillin G) और एमोक्सिसिलिन ट्राइहाइड्रेट (Amoxycillin Trihydrate) जैसे जरूरी फार्मा इंग्रीडिएंट्स के साथ-साथ टैकिफायर रेजिन और लिफ्ट गाइड रेल्स जैसे इंडस्ट्रियल इनपुट्स शामिल हैं। घरेलू कंपनियों का आरोप है कि चीन के सस्ते इंपोर्ट्स से उनके कारोबार को काफी नुकसान हो रहा है।
ग्लोबल मार्केट पर भी नजर
सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि रेगुलेटर अब ग्लोबल ट्रेड प्रैक्टिस को लेकर भी सख्त हो गया है। आइसोप्रोपिल अल्कोहल (Isopropyl Alcohol) के मामले में यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया, ताइवान और अमेरिका से होने वाले आयात की जांच हो रही है, जबकि रूस से आने वाले पेंटाएरीथ्रिटोल (Pentaerythritol) पर भी डंपिंग की आशंका है।
नियमों को दरकिनार करने वालों पर शिकंजा
DOZCO India के केस के बाद DGTR ने एंटी-सर्कमवेंशन जांच भी शुरू की है। आरोप है कि चीन और दक्षिण कोरिया पर लगे ड्यूटी से बचने के लिए सामान को मलेशिया के रास्ते घुमाया जा रहा है। जून 2024 के बाद मलेशिया से भारत आने वाले सामान में अचानक भारी उछाल देखा गया है, जो इस संदेह को पुख्ता करता है।
कॉपर सेक्टर में भी मंथन
कॉपर ट्यूब और पाइप्स के लिए सरकार 'सनसेट रिव्यू' कर रही है। Ram Ratna Wires Limited और MetTube Copper India जैसी कंपनियां चाहती हैं कि मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम पर लगी ड्यूटी जारी रहे, ताकि विदेशी सब्सिडाइज्ड माल की बाढ़ न आए।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
निवेशकों के लिए यह स्थिति मिली-जुली है। अगर सरकार ड्यूटी लगाती है, तो घरेलू कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को सपोर्ट मिलेगा, लेकिन साथ ही उन इंडस्ट्रीज के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है जो इन चीजों का इस्तेमाल करती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि DGTR अपनी फाइनल रिपोर्ट में क्या सिफारिशें देता है।
