साल 2026 में IPO मार्केट ने निवेशकों को **19.1%** का शानदार रिटर्न दिया है, जो Nifty के मुकाबले काफी ज्यादा है। हालांकि, लिस्टिंग वाले दिन ही शेयरों के टूटने की बढ़ती घटनाओं ने निवेशकों की सुरक्षा के लिए 'मेंडेटरी ग्रेडिंग सिस्टम' की मांग को फिर से तेज कर दिया है।
भारतीय प्राइमरी मार्केट में साल 2026 जबरदस्त हलचल वाला रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच आए 108 मेन बोर्ड IPO में जिसने भी निवेश किया, उसे औसतन 19.1% का मुनाफा हुआ। वहीं, दूसरी तरफ सेकेंडरी मार्केट में Nifty का प्रदर्शन महज 1% से 2% के दायरे में सिमटा रहा।
लिस्टिंग के दिन ही 'डूबा' पैसा
आंकड़े भले ही लुभावने लगें, लेकिन हकीकत थोड़ी कड़वी है। बाजार में 13% की एनुअलाइज्ड वोलैटिलिटी (Volatility) के कारण लिस्टिंग वाले दिन की चाल का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। स्थिति यह है कि इस दौरान करीब 25% कंपनियों के शेयर अपने इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट हुए। छोटे और मध्यम स्तर के SME IPO में तो हालात और खराब हैं, जहां 1/3 कंपनियों ने पहले ही दिन निवेशकों को घाटा दिया।
क्यों जरूरी है 'IPO ग्रेडिंग'?
इन आंकड़ों ने बाजार के जानकारों को फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। फिलहाल भारत में IPO ग्रेडिंग स्वैच्छिक (Optional) है। SEBI रजिस्टर्ड क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां 5 पॉइंट स्केल पर ग्रेडिंग तो देती हैं, लेकिन कंपनियां इसे टालती हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कम ग्रेड मिलने से मार्केट में उनकी साख गिर जाएगी।
जानकारों का मानना है कि मौजूदा डिस्क्लोजर डॉक्यूमेंट्स रिटेल निवेशकों के लिए कंपनी की असल सेहत परखने के लिए नाकाफी हैं। एक अनिवार्य और स्टैंडर्ड ग्रेडिंग सिस्टम से कॉरपोरेट गवर्नेंस, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी और मैनेजमेंट क्वालिटी जैसे मानकों पर पारदर्शिता आएगी। इससे निवेशक यह समझ पाएंगे कि कौन सी कंपनी फंडामेंटल्स के दम पर चल रही है और कौन सिर्फ बाजार के 'हाइप' (Hype) पर सवार है।
पिछली गलतियों से सीख
पिछली बार जब ग्रेडिंग अनिवार्य थी, तो उसका मुख्य फोकस लिस्टिंग गेन पर था। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि अगर नया सिस्टम आता है, तो उसका केंद्र 'लॉन्ग टर्म बिजनेस परफॉर्मेंस' होना चाहिए, न कि पहले दिन की शेयर प्राइस मूवमेंट। फिलहाल, निवेशकों के लिए मंत्र यही है कि वे किसी भी कंपनी में पैसा लगाने से पहले इंडिपेंडेंट रिसर्च और फाइनेंशियल एनालिसिस पर ही भरोसा करें।
