वित्तीय वर्ष 2026 में भारत के F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) मार्केट में रिटेल निवेशकों की संख्या में 20% की बड़ी गिरावट आई है। SEBI के कड़े नियमों के बाद अब केवल 78.6 लाख रिटेल ट्रेडर ही बाजार में सक्रिय हैं। हालांकि, कुल नुकसान कम हुआ है, लेकिन प्रति ट्रेडर औसत नुकसान बढ़कर ₹1.17 लाख हो गया है। यह दिखाता है कि कम लोग ट्रेडिंग कर रहे हैं, लेकिन जो कर रहे हैं उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
F&O बाजार में क्यों आई गिरावट?
वित्तीय वर्ष 2026 के आंकड़े बताते हैं कि रिटेल निवेशकों का डेरिवेटिव्स मार्केट से जुड़ाव कम हुआ है। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में व्यक्तिगत ट्रेडर्स की संख्या घटकर 78.6 लाख रह गई है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के 98.1 लाख से 20% कम है। यह गिरावट बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए रेगुलेटर SEBI द्वारा उठाए गए कई कड़े कदमों का नतीजा है।
SEBI के नए नियम और बाजार पर असर
नवंबर 2024 के आसपास, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को अधिक अनुशासित बनाने के लिए कई उपाय लागू किए। इनमें साप्ताहिक इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को तर्कसंगत बनाना, न्यूनतम कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना और बायर्स से ऑप्शन प्रीमियम की अग्रिम वसूली अनिवार्य करना शामिल था। इन नियमों का मकसद कैजुअल या बिना जानकारी वाले निवेशकों को हाई-रिस्क वाले डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स से दूर रखना था। इसके परिणामस्वरूप, व्यक्तिगत प्रतिभागियों की संख्या में कमी आई है और F&O स्पेस में रिटेल निवेशकों का आधार सिकुड़ गया है।
नुकसान का चौंकाने वाला आंकड़ा: कम लोग, ज्यादा दर्द
हालांकि रिटेल ट्रेडर्स द्वारा कुल नुकसान (एग्रीगेट लॉस) 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार सभी के लिए सुरक्षित हो गया है। एक गहराई से विश्लेषण से एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आती है: प्रति ट्रेडर औसत नुकसान वास्तव में बढ़ गया है। FY26 में, प्रति व्यक्ति औसत नुकसान ₹1,16,654 था, जो FY25 के ₹1,13,913 से अधिक है।
यह आंकड़ा निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। यह बताता है कि F&O मार्केट में पैसा खोने वाले लोगों की कुल संख्या भले ही कम हो गई हो, लेकिन जो ट्रेडर बाजार में बने हुए हैं, उन्हें कहीं अधिक वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसका सीधा मतलब है कि डेरिवेटिव्स से जुड़े जोखिम, जहां नुकसान तेजी से और भारी हो सकता है, उन लोगों के लिए बहुत अधिक बने हुए हैं जिनके पास मजबूत रिस्क मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी या बाजार की गहरी समझ नहीं है।
मार्केट टर्नओवर और टैक्स कलेक्शन
F&O सेगमेंट में कुल ट्रेडिंग एक्टिविटी में भी नरमी देखी गई। इस साल कुल टर्नओवर ₹202 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹213 लाख करोड़ से थोड़ा कम है। इसके बावजूद, सरकार को सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से लगातार उच्च राजस्व प्राप्त हो रहा है। FY26 में F&O ट्रेडों से ₹27,695 करोड़ का कलेक्शन हुआ, जिसमें अकेले ऑप्शंस ट्रेडिंग से ₹19,802 करोड़ का योगदान रहा।
आगे देखते हुए, बाजार के जानकारों का मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि क्या यह घटती भागीदारी का चलन जारी रहता है और क्या SEBI निवेशकों की सुरक्षा के लिए और कदम उठाता है। सरकार ने यह भी नोट किया है कि वह अभी हाई-फ्रीक्वेंसी और एल्गोरिथम ट्रेडिंग के बाजार की निष्पक्षता पर पड़ने वाले प्रभाव का पूरी तरह से आकलन कर रही है। व्यक्तिगत निवेशकों के लिए, यह डेटा इस बात की पुष्टि करता है कि F&O सेगमेंट एक हाई-रिस्क वाला क्षेत्र है, जहां गलत दांव लगाने की कीमत, भले ही बाजार में भागीदारी कम हो, काफी ज्यादा हो सकती है।
