GIFT City Listing Rules: अब विदेशी बाजार से जुटाना होगा आसान, सरकार ने बदले नियम

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
GIFT City Listing Rules: अब विदेशी बाजार से जुटाना होगा आसान, सरकार ने बदले नियम

सरकार ने ओवरसीज लिस्टिंग के नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब ज्यादा भारतीय कंपनियां GIFT City के जरिए आसानी से कैपिटल जुटा सकेंगी। नई गाइडलाइंस के तहत कर्ज में डूबी कंपनियों को भी लिस्टिंग की अनुमति मिलेगी, बशर्ते उन्हें संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) का तगड़ा समर्थन मिले।

नियमों में बड़ा बदलाव

मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स ने 'Companies (Listing of Equity Instruments in Permissible Jurisdictions) Amendment Rules, 2026' पेश किए हैं। इसका मुख्य मकसद भारतीय पब्लिक कंपनियों के लिए GIFT International Financial Services Centre (IFSC) में लिस्टिंग की राह को आसान बनाना है।

क्या बदला है?

  • इक्विटी का दायरा बढ़ा: अब कंपनियां सिर्फ स्टैंडर्ड इक्विटी ही नहीं, बल्कि कन्वर्टिबल डिबेंचर्स और प्रेफरेंस शेयर्स के जरिए भी विदेशी बाजारों से पैसा जुटा सकती हैं।
  • निगेटिव नेटवर्थ वाली कंपनियों को मौका: जिन कंपनियों पर कर्ज ज्यादा है या नेटवर्थ निगेटिव है, वे भी अब लिस्टिंग कर सकती हैं। शर्त यह है कि ऑफर का कम से कम 75% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (QII) को अलॉट किया जाना चाहिए।
  • डिफॉल्ट की अवधि घटी: जिन कंपनियों ने पहले पेमेंट में डिफॉल्ट किया है, उनके लिए अयोग्य रहने की अवधि को 2 साल से घटाकर सिर्फ 6 महीने कर दिया गया है।

चुनौतियां और रिस्क

हालांकि यह बदलाव स्वागत योग्य हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स अभी भी सावधान हैं। GIFT City का इकोसिस्टम अभी शुरुआती दौर में है। हाल ही में XED Executive Development Ltd का IPO कम सब्सक्रिप्शन के कारण वापस लेना इसका एक बड़ा उदाहरण है। सबसे बड़ा जोखिम 'मार्केट एपेटाइट' का है, क्योंकि 75% इंस्टीट्यूशनल हिस्सा जुटाना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। इसके अलावा, डॉलर-डिनॉमिनेटेड लिस्टिंग और अलग-अलग डिस्क्लोजर नियमों का तालमेल बिठाना कंपनियों के लिए एक जटिल प्रक्रिया बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.