Commodity Market: मार्जिन नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, ट्रेडर्स को मिलेगी बड़ी राहत

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AuthorMehul Desai|Published at:
Commodity Market: मार्जिन नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, ट्रेडर्स को मिलेगी बड़ी राहत

भारतीय कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट अब लिक्विडिटी बढ़ाने और बाजार को ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए मार्जिन पॉलिसी में बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। रेगुलेटर का फोकस अब 'सेटलमेंट गारंटी फंड' को मजबूत करने पर है ताकि ट्रेडर्स के लिए एंट्री कॉस्ट कम हो सके।

भारतीय कमोडिटी बाजार में इस समय एक महत्वपूर्ण नीतिगत बहस चल रही है। अब तक घरेलू एक्सचेंज कड़े मार्जिन नियमों के जरिए सिस्टम को डिफॉल्ट से बचाते आए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये ऊंची लागत मार्केट में बाधा बन रही है। यही वजह है कि कई कॉरपोरेट हेजर्स (Hedgers) अब ग्लोबल एक्सचेंजों की ओर रुख कर रहे हैं या मार्केट से दूरी बना रहे हैं।

रिस्क-आधारित योगदान की ओर कदम

रेगुलेटरी बदलाव का मुख्य केंद्र अब 'सेटलमेंट गारंटी फंड' है। सरकार और रेगुलेटर ऐसे सिस्टम पर काम कर रहे हैं जहां मार्जिन को सिर्फ एक फिक्स्ड रेट न रखकर, रिस्क के आधार पर तय किया जाए। इसके तहत, जो सदस्य कम लिक्विड एसेट्स में ट्रेड करते हैं या जिनका एक्सपोजर ज्यादा है, उन्हें फंड में अधिक योगदान देना होगा। इससे उन ट्रेडर्स के लिए मार्जिन कम हो जाएगा जो कम रिस्क वाली एक्टिविटी करते हैं।

सिस्टम की सुरक्षा और लिक्विडिटी

मार्जिन को कम करते समय सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स (Clearing Corporations) को नए अधिकार दिए जा सकते हैं। प्रस्तावों में ये शामिल है:

  • क्रेडिट लाइन्स: प्रमुख वित्तीय संस्थानों के साथ कमिटेड क्रेडिट लाइन्स का इंतजाम करना, जो मार्केट तनाव के समय लिक्विडिटी बफर का काम करेंगे।
  • इमरजेंसी कैपिटल: जरूरत पड़ने पर नॉन-डिफॉल्टिंग मेंबर्स द्वारा इमरजेंसी कैपिटल का प्रावधान करना।
  • RBI के साथ तालमेल: सिस्टमैटिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थाओं को लिक्विडिटी तक पहुंच दिलाने के लिए Reserve Bank of India के साथ मिलकर काम करना।

अब निवेशकों और मार्केट प्रतिभागियों की नजर SEBI के आगामी सर्कुलर्स और मार्जिन स्ट्रक्चर में होने वाले बदलावों पर टिकी है। इन सुधारों का उद्देश्य भारतीय कमोडिटी मार्केट को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के बराबर लाना है ताकि मार्केट में वॉल्यूम बढ़ सके और हेजिंग करना सस्ता हो सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.