Income Tax Department ने अंतरराष्ट्रीय टैक्स फाइलिंग में बड़ी खामियां पकड़ी हैं। लगभग **98%** गलतियां गलत या अधूरे टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (TIN) के कारण हो रही हैं, जिससे बैंकों और म्यूचुअल फंड्स के लिए नए नियम आने का खतरा बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय टैक्स रिपोर्टिंग में चूक
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने FATCA और CRS के तहत अंतरराष्ट्रीय वित्तीय जानकारी साझा करने में गंभीर डेटा गैप की पहचान की है। आंकड़ों के अनुसार, 97% से 98% रिपोर्टिंग खामियां सिर्फ इसलिए हो रही हैं क्योंकि खाताधारकों के टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (TIN) या तो गलत हैं या फिर दर्ज ही नहीं किए गए हैं। यह डेटा भारत को 90 से अधिक देशों के साथ वित्तीय जानकारी साझा करने में बाधा पैदा कर रहा है।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर दबाव
प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल ऑफ इनकम टैक्स, Debjyoti Das ने साफ किया है कि अकाउंट ओपनिंग के दौरान डेटा कलेक्शन की मौजूदा प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है। इस समस्या से निपटने के लिए इनकम टैक्स विभाग अब SEBI जैसे रेगुलेटर्स के साथ मिलकर काम कर रहा है। जल्द ही अकाउंट खोलने के नियमों को और अधिक कड़ा किया जा सकता है ताकि शुरुआत से ही सही डेटा कैप्चर हो सके।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
हालांकि विभाग अभी पेनल्टी लगाने के बजाय ट्रेनिंग पर जोर दे रहा है, लेकिन लंबे समय तक नियमों का पालन न करने पर अमेरिकी क्लाइंट्स से जुड़ी ट्रांजेक्शन पर भारी 'विदहोल्डिंग टैक्स' (Withholding Tax) पेनल्टी लग सकती है। इतना ही नहीं, यह चूक भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग पर भी दबाव डाल सकती है।
निवेशकों को अब बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में KYC प्रोसेस के दौरान सख्त प्रोटोकॉल के लिए तैयार रहना चाहिए। आने वाले समय में SEBI, RBI और अन्य रेगुलेटर्स की तरफ से नए सर्कुलर जारी किए जा सकते हैं, जिनसे संस्थानों का अनुपालन खर्च (Compliance Cost) बढ़ सकता है।
