Income Tax Department: 394 कंपनियों पर कसेगा शिकंजा! संदिग्ध विदेशी रेमिटेंस मामले में शुरू हुई जांच

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Income Tax Department: 394 कंपनियों पर कसेगा शिकंजा! संदिग्ध विदेशी रेमिटेंस मामले में शुरू हुई जांच

आयकर विभाग ने देश भर में 394 ऐसी कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू की है, जिन पर विदेशी पैसे भेजने के नियमों के दुरुपयोग का शक है। यह जांच उन फर्मों पर केंद्रित है जिनके पास असली कारोबारी गतिविधियां नहीं हैं और साथ ही 36 ऐसे प्रोफेशनल्स की भी पड़ताल की जा रही है जो इन ट्रांजैक्शंस को प्रमाणित करने के लिए जिम्मेदार थे।

क्यों हो रही है जांच?

18 अगस्त 2026 को, आयकर विभाग ने संदिग्ध विदेशी रेमिटेंस (Foreign Remittances) पर नकेल कसने के लिए देशव्यापी जांच अभियान छेड़ा है। इस बड़ी कार्रवाई में देश भर की 394 कंपनियाँ शामिल हैं, खासकर वे जो ज़मीनी सीमा वाले राज्यों के आसपास काम कर रही हैं। यह जांच पिछले तीन सालों की खुफिया जानकारी पर आधारित है, जो पहले के फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों के मामलों से जुड़ी हैं। आरोप है कि इन ट्रस्टों का इस्तेमाल गलत तरीके से पैसे भेजने और अवैध वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा था।

टैक्स विभाग उन कंपनियों की पड़ताल कर रहा है जिनमें कुछ खास संकेत (Red Flags) मिले हैं। जैसे कि, उनके पास बहुत कम या कोई असली कारोबारी काम-काज नहीं है, भारी टर्नओवर के बावजूद इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है, या उनके फाइनेंशियल रिकॉर्ड भेजे जा रहे पैसों से मेल नहीं खाते। इस मुहिम का मकसद यह पक्का करना है कि एक देश से दूसरे देश भेजे जाने वाले पैसे असली व्यावसायिक लेनदेन पर आधारित हों, न कि मनी लॉन्ड्रिंग या टैक्स चोरी के लिए इस्तेमाल हों।

प्रमाणित करने वाले प्रोफेशनल्स पर भी पैनी नजर

इस जांच का दायरा उन 36 प्रोफेशनल्स तक भी फैला है जो फॉर्म 15CB और फॉर्म 146 सर्टिफिकेट जारी करने के लिए जिम्मेदार हैं। ये सर्टिफिकेट विदेशी रेमिटेंस पर टैक्स काटा गया है या नहीं, इसे प्रमाणित करने के लिए ज़रूरी होते हैं। टैक्स अधिकारियों ने पाया है कि कुछ प्रोफेशनल्स ने ग्राहकों के दस्तावेज़ों, समझौतों या ट्रांजेक्शन के पीछे के व्यावसायिक तर्क की ठीक से जांच किए बिना ही ये सर्टिफिकेट जारी कर दिए होंगे।

इस कार्रवाई के तहत, अब प्रोफेशनल्स से उम्मीद की जाती है कि वे अधिक सावधानी बरतें। आयकर विभाग ने साफ कर दिया है कि सिर्फ ग्राहकों द्वारा दिए गए दस्तावेज़ों पर भरोसा करना काफी नहीं होगा। प्रमाणित करने वाले प्रोफेशनल्स से उम्मीद है कि वे फंड की प्रकृति, स्रोत और लाभार्थी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें, साथ ही यह भी देखें कि ट्रांजेक्शन ग्राहक की वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों से मेल खाता हो। ऐसे प्रोफेशनल्स जो लापरवाही बरतते पाए जाएंगे, उन्हें गैर-सबूत वाले ट्रांजेक्शन को प्रमाणित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

व्यवसायों और अनुपालन पर असर

कंपनियों के लिए, यह डेवलपमेंट अंतरराष्ट्रीय भुगतानों (International Payments) के संबंध में नियामक निगरानी (Regulatory Watchfulness) के एक ऐसे दौर की शुरुआत है। जो कंपनियाँ अक्सर सीमा पार लेनदेन (Cross-border Transactions) करती हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके दस्तावेज़ मजबूत, पारदर्शी और सक्रिय व्यावसायिक गतिविधियों से स्पष्ट रूप से जुड़े हों। यह जांच उन संस्थाओं के लिए टैक्स पुनर्मूल्यांकन (Tax Reassessments), जुर्माने या कानूनी कार्रवाई की संभावना को उजागर करती है जो अपने विदेशी भुगतानों की व्यावसायिक आवश्यकता को साबित नहीं कर पातीं।

निवेशकों और व्यवसाय मालिकों को इस जांच के नतीजों पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि इससे भविष्य में विदेशी रेमिटेंस को प्रोसेस करने के लिए और सख्त नियम बन सकते हैं। बाजार सहभागियों (Market Participants) के लिए मुख्य बात यह है कि बैंकों और अधिकृत डीलरों द्वारा ग्राहकों के लिए विदेशी रेमिटेंस को प्रोसेस करते समय अनुपालन की समय-सीमा (Compliance Timelines) बढ़ सकती है और दस्तावेज़ों की आवश्यकताएं और अधिक कठोर हो सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.