TVS ग्रुप के प्रमोटर परिवार में सक्सेशन (Succession) को लेकर चल रहे विवाद पर प्रॉक्सी एडवाइजर InGovern ने चिंता जताई है। फर्म का मानना है कि पुराने समझौतों को फिर से खोलने से माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स पर बुरा असर पड़ सकता है।
प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म InGovern Research Services ने वेणु श्रीनिवासन परिवार के बीच बढ़ते सक्सेशन विवाद पर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। फर्म ने साफ कहा है कि मालिकाना हक और संपत्ति के बंटवारे को लेकर पुराने समझौतों को चुनौती देने से कंपनी की कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) अस्थिर हो सकती है, जिससे माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए अनिश्चितता का माहौल बन सकता है।\n\n### क्या है विवाद की जड़?\n\nयह विवाद वेणु श्रीनिवासन के परिवार के दो धड़ों के बीच है। एक तरफ वेणु श्रीनिवासन और उनके बेटे सुदर्शन वेणु हैं, तो दूसरी तरफ मल्लिका श्रीनिवासन और उनकी बेटी लक्ष्मी वेणु हैं। मुख्य विवाद मार्च 2024 के एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को लेकर है। एक गुट का तर्क है कि 2020 के समझौते से सब कुछ तय हो चुका था, जबकि दूसरा गुट इसे अभी भी अधूरा मान रहा है।\n\n### लीगल एक्शन की तैयारी\n\nप्रमोटर लेवल की इस खींचतान के कारण अब मामला कोर्ट पहुंच चुका है। दोनों ही गुटों ने NCLT और चेन्नई कोर्ट में कैविएट (Caveat) दाखिल किए हैं ताकि बिना उनकी बात सुने कोई भी आदेश पारित न हो। हालांकि, TVS Motor Company और TVS Holdings के कामकाज पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन पब्लिक डोमेन में इस तरह के विवादों का आना ऑपरेशनल फोकस के लिए रिस्क पैदा करता है।\n\n### निवेशकों को क्या करना चाहिए?\n\nInGovern ने जोर दिया है कि बिजनेस वैल्यूएशन और मालिकाना हक के फैसले सार्वजनिक बहसों के बजाय कानूनी फ्रेमवर्क और ट्रस्ट डीड्स के आधार पर होने चाहिए। TVS Holdings, जो TVS Motor Company में एक कंट्रोलिंग इंटरेस्ट रखती है, वहां प्रमोटर लेवल पर एकता की कमी का मतलब है कि लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक फैसलों पर सवाल उठ सकते हैं।\n\nफिलहाल, कंपनी का बिजनेस ऑपरेशनल लक्ष्यों पर टिका हुआ है, लेकिन निवेशकों को अब NCLT की कार्यवाही और कंपनी की तरफ से आने वाली डिस्क्लोजर अपडेट्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
