IRDAI ने एक नई 'पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री' (PIR) का प्रस्ताव पेश किया है। इसका मकसद इंश्योरेंस सेक्टर में डेटा को यूनिफाइड (Unified) करना है ताकि क्लेम और अंडरराइटिंग की प्रक्रिया आसान हो सके।
क्या है IRDAI की नई योजना?
बीमा नियामक IRDAI ने 1 सितंबर, 2026 को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसका लक्ष्य भारतीय बीमा बाजार के लिए एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) तैयार करना है। यह कदम 'सबका बीमा, सबकी रक्षा' (संशोधन अधिनियम, 2025) के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उठाया गया है।
कैसे काम करेगी यह रजिस्ट्री?
यह एक 'फेडरेटेड मॉडल' (Federated Model) पर आधारित होगी। इसका मतलब है कि ग्राहक का मेडिकल रिकॉर्ड और KYC जैसे संवेदनशील दस्तावेज किसी एक सेंट्रल डेटाबेस में नहीं, बल्कि संबंधित बीमा कंपनी के पास ही सुरक्षित रहेंगे। यह रजिस्ट्री केवल एक 'डिजिटल ब्रिज' का काम करेगी, जिससे केवल अधिकृत पार्टियां ही सहमति-आधारित ढांचे (Consent-based framework) के जरिए डेटा एक्सेस कर सकेंगी।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
इंश्योरेंस सेक्टर में डेटा साइलो (Data Silos) की समस्या बहुत पुरानी है, जिससे क्लेम सेटलमेंट में देरी और अनक्लेम्ड पैसा फंसने जैसी दिक्कतें आती हैं। अब कंपनियों को अपने डेटा को नए मानकों के अनुसार ढालना होगा।
निवेशकों को दो बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- तकनीकी क्षमता: जिन कंपनियों के पास मॉडर्न टेक्नोलॉजी स्टैक है, वे इस बदलाव को आसानी से अपना सकेंगी।
- अनुपालन लागत: पुरानी लेगेसी सिस्टम (Legacy Systems) वाली कंपनियों पर इसका भारी बोझ पड़ सकता है।
हालांकि, डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती बनी रहेगी। इस पर फीडबैक देने की आखिरी तारीख 30 सितंबर, 2026 तय की गई है।
