IRDAI ने डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन और मैनेजमेंट खर्च को सीमित करने के बड़े प्रस्ताव पेश किए हैं। मिस-सेलिंग रोकने के इरादे से लाए गए इन नियमों ने इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में भारी उठापटक पैदा कर दी है।
रेगुलेटर का नया मास्टरप्लान
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने इंश्योरेंस सेक्टर की तस्वीर बदलने के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसका नाम 'Recalculating Economics of Insurance Distribution' है। इसका मुख्य उद्देश्य इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की बिक्री में पारदर्शिता लाना और मिस-सेलिंग (गलत तरीके से पॉलिसी बेचना) पर लगाम लगाना है।
कमीशन और खर्चों पर लगाम
नए प्रस्तावों के तहत, लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मैनेजमेंट खर्च (EoM) की सीमा को अगले 2 साल में ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम (GDPI) के 15% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है, जो 5 साल के भीतर घटकर 12.5% हो जाएगा। वहीं, जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह सीमा 20% तय की गई है। इसके अलावा, लोन के साथ जबरन इंश्योरेंस बेचने (Bundling) पर भी पूरी तरह बैन लगाने का प्रस्ताव है।
बाजार पर असर और निवेशकों की चिंता
यह खबर आते ही बाजार में डर का माहौल है। ब्रोकरेज मॉडल पर काम करने वाली कंपनियों का रेवेन्यू 60% से 70% तक प्रभावित हो सकता है। इसी के चलते 24 सितंबर, 2026 को फिनटेक कंपनी PB Fintech के शेयर में लगभग 36% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
इंडस्ट्री में इस बात की भी चर्चा है कि अगर ये नियम लागू होते हैं, तो डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में करीब 10 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। पब्लिक फीडबैक के लिए विंडो 25 अक्टूबर, 2026 तक खुली है, जिसके बाद 2027 की शुरुआत में नई गाइडलाइंस प्रभावी हो सकती हैं।
