IRDAI अब बीमा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रहा है। कंपनियों द्वारा भारी डिस्काउंट और कमीशन के खेल को रोकने के लिए नया ढांचा बनाया जा रहा है, क्योंकि फाइनेंशियल ईयर 2026 में इंडस्ट्री को **₹20,267 करोड़** का भारी अंडरराइटिंग घाटा झेलना पड़ा है।
घाटे की मार और सख्त नियम
बीमा क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियां बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रीमियम में भारी कटौती कर रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि फायर इंश्योरेंस जैसे सेगमेंट में 99% तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में इंडस्ट्री का कुल अंडरराइटिंग लॉस ₹20,267 करोड़ रहा, जबकि FY20 से अब तक सरकारी बीमा कंपनियों में ₹17,450 करोड़ की पूंजी डालने के बावजूद, तीन प्रमुख सरकारी कंपनियां बार-बार सॉल्वेंसी नॉर्म्स का उल्लंघन कर रही हैं।
बिचौलियों और पारदर्शिता पर नजर
रेगुलेटर का मुख्य ध्यान अब डिस्ट्रीब्यूशन चैनल पर है। फिलहाल, मात्र 10 बड़े ब्रोकर्स के पास जनरल इंश्योरेंस मार्केट का 70% हिस्सा है। IRDAI अब बिचौलियों को दिए जाने वाले कमीशन और मार्केटिंग खर्च के नाम पर छिपे हुए खर्चों का पूरा खुलासा अनिवार्य करने जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
सरकार अब इंड AS (Ind AS) के जरिए कंपनियों की अकाउंटिंग में पारदर्शिता लाना चाहती है ताकि कोई भी कंपनी खराब परफॉर्मेंस को जटिल अकाउंटिंग के पीछे न छिपा सके। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो आक्रामक प्राइसिंग के दम पर मार्केट शेयर बढ़ा रही हैं, क्योंकि नए नियम लागू होने के बाद उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। आने वाले समय में कमीशन कैप और रिस्क-बेस्ड सॉल्वेंसी नियमों की आधिकारिक घोषणा सेक्टर के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होगी।
