IRDAI इंश्योरेंस कंपनियों के मैनेजमेंट खर्चों (Management Expenses) और कमीशन स्ट्रक्चर पर लगाम लगाने की तैयारी में है। इस कदम का सीधा मकसद पॉलिसीधारकों पर पड़ने वाले बोझ को कम करना है।
बीमा सेक्टर में बदलाव की नई लहर शुरू होने वाली है। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) अब कंपनियों के ऑपरेशनल खर्चों को सीमित करने के सख्त नियम ला रही है। इसका मुख्य लक्ष्य बिजनेस ओवरहेड्स को कम करना है, ताकि भविष्य में ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम सस्ते हो सकें।
कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
आंकड़ों पर गौर करें तो कई प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां फिलहाल 22% से 32% तक का भारी-भरकम खर्च कर रही हैं। वहीं, LIC और SBI Life Insurance जैसे दिग्गजों का खर्च 11% से 12% के दायरे में रहता है। रेगुलेटर का साफ कहना है कि अब कंपनियों को अपने खर्चों को वाजिब ठहराना होगा, न कि उसका बोझ ग्राहकों पर डालना होगा।
कमीशन पर 'कैप' से क्या बदलेगा?
रेगुलेटर की सबसे बड़ी चिंता इंश्योरेंस एजेंटों को मिलने वाला भारी कमीशन है, जो कभी-कभी पहले साल के प्रीमियम का 40% से 50% तक होता है। IRDAI को डर है कि ज्यादा कमीशन के लालच में एजेंट गलत पॉलिसी बेच देते हैं (Mis-selling)। इस पर कैप लगाने से डिस्ट्रीब्यूटर्स का ध्यान ग्राहकों की जरूरत पर केंद्रित होगा।
Bima Sugam और भविष्य की राह
पारदर्शिता लाने के लिए नवंबर में 'Bima Sugam' प्लेटफॉर्म भी लॉन्च होने वाला है, जो डिजिटल तरीके से इंश्योरेंस खरीदने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। इस पूरे बदलाव का असर 2026 की शुरुआत तक दिखने लगेगा। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी होगी कि कंपनियां इन नए नियमों के बीच अपने मुनाफे (Profit Margins) को कैसे मेंटेन रखती हैं।
