IRDAI ने डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन और खर्चों पर लगाम लगाने के लिए **5** साल का नया प्लान पेश किया है। पिछले कुछ सालों में प्रीमियम ग्रोथ के मुकाबले डिस्ट्रीब्यूटर्स का पेआउट तेजी से बढ़ा है, जिस पर रेगुलेटर ने अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
बीमा क्षेत्र में बढ़ते खर्चों को नियंत्रित करने के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने 23 सितंबर 2026 को एक अहम कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। रेगुलेटर का मुख्य उद्देश्य मैनेजमेंट खर्च (EoM) की सीमाओं को 5 साल के भीतर कम करना है। दरअसल, फाइनेंशियल ईयर 2023 से 2025 के बीच, जहां इंश्योरेंस प्रीमियम में 28% की बढ़ोतरी हुई, वहीं डिस्ट्रीब्यूटर्स को दिए जाने वाले पेआउट में 125% का भारी उछाल आया।
मुनाफे पर असर
फिलहाल प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का एक्सपेंस रेशियो 20.2% है, जबकि जनरल इंश्योरर्स के लिए यह आंकड़ा 32.1% तक है। नए प्रस्ताव के तहत, IRDAI इसे धीरे-धीरे घटाकर लाइफ इंश्योरर्स के लिए 12.5% और जनरल इंश्योरर्स के लिए 20% पर लाना चाहता है। इसका सीधा असर HDFC Life, SBI Life, ICICI Prudential Life, ICICI Lombard और Star Health जैसी लिस्टेड कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ सकता है।
नई डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी
रेगुलेटर ने थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस पर कमीशन खत्म करने का संकेत दिया है, क्योंकि इसे बेचने में कम मशक्कत लगती है। वहीं, छोटे शहरों में सेल्स को बढ़ावा देने के लिए 10% का इंसेंटिव देने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सभी प्रोडक्ट्स के लिए 'वन-पेज समरी' अनिवार्य करने और क्लेम सेटलमेंट को वॉल्यूम-आधारित के बजाय कैश-आधारित मेट्रिक में बदलने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
