सितंबर महीने में भारतीय शेयर बाजार में **28** हालिया लिस्टेड कंपनियों के 'लॉक-इन' पीरियड खत्म होने वाले हैं, जिससे **$2.3 बिलियन** मूल्य के शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे।
भारतीय सेकेंडरी मार्केट में इस सितंबर 2026 में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 कंपनियों के लॉक-इन प्रतिबंध हट रहे हैं, जिससे कुल 575 मिलियन शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए खुल जाएंगे। यह घटनाक्रम बाजार में सप्लाई प्रेशर बढ़ा सकता है।
लॉक-इन एक्सपायरी क्या है?
IPO के समय सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार, शुरुआती निवेशकों जैसे वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी फंड्स को एक निश्चित समय तक शेयर बेचने की अनुमति नहीं होती। जब यह समय पूरा होता है, तो इन निवेशकों के पास अपना मुनाफा वसूली करने का मौका होता है। यदि बाजार में डिमांड से ज्यादा सप्लाई आती है, तो शेयर की कीमतों पर दबाव बन सकता है।
किन शेयरों पर रखें नजर?
निवेशकों की नजरें उन कंपनियों पर टिकी हैं जहां भारी मात्रा में शेयर बाजार में आने वाले हैं:
- Manipal Health Enterprises: 2 सितंबर को 35 मिलियन शेयर खुलेंगे। यह स्टॉक अपने इश्यू प्राइस से 31% ऊपर ट्रेड कर रहा है, जिससे प्रॉफिट बुकिंग का डर बना हुआ है।
- SEDEMAC Mechatronics: 10 सितंबर को इसके 17 मिलियन शेयर (कुल इक्विटी का 38%) बाजार में आएंगे। शेयर अपने इश्यू प्राइस से 123% ऊपर है।
- GSP Crop Science: 25 सितंबर को 25 मिलियन शेयर (कुल फ्लोट का 53%) अनलॉक होंगे। स्टॉक 96% के मुनाफे पर है।
मार्केट का रिस्क फैक्टर
हर कंपनी के लिए स्थिति अलग है। जहां कुछ शेयर शानदार रिटर्न के बाद बिकवाली झेल सकते हैं, वहीं Saatvik Green Energy जैसे शेयर अपने इश्यू प्राइस से 9% नीचे ट्रेड कर रहे हैं। यहां निवेशक नुकसान कम करने के लिए शेयर बेच सकते हैं।
हालांकि, यह एक रूटीन प्रक्रिया है और अक्सर लॉन्ग-टर्म प्रमोटर्स अपने शेयर होल्ड करके रखते हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बल्क डील्स (Bulk Deals) और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर कड़ी नजर रखें ताकि सप्लाई का असर साफ समझा जा सके।
