UPI Fee Hike: NPCI के नए MDR नियम को IIT-Bombay की चुनौती, फीस घटाने की मांग

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
UPI Fee Hike: NPCI के नए MDR नियम को IIT-Bombay की चुनौती, फीस घटाने की मांग

IIT-Bombay के शोधकर्ताओं ने NPCI के आगामी **0.4%** मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे घटाकर **0.08%** करने का सुझाव दिया है और कहा है कि बैंकों को अपनी ब्याज आय से इसका खर्च उठाना चाहिए। यह नया नियम **15 अक्टूबर, 2026** से लागू होना है।

भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की लागत और भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है। NPCI ने 15 अक्टूबर, 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के P2M UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR लगाने का फैसला किया है, जिसे लेकर IIT-Bombay के शोधकर्ताओं ने एक नई चुनौती पेश की है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस फीस को 0.08% तक सीमित किया जाना चाहिए।

बैंक अपनी कमाई से क्यों उठाएं बोझ?

प्रोफेसर आशीष दास और पूर्व RBI अधिकारी प्रज्ञा दास की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे के लिए व्यापारियों पर बोझ डालना सही नहीं है। डेटा के मुताबिक, बैंकों ने 2026 फाइनेंशियल ईयर में CASA डिपॉजिट्स से ₹4.85 लाख करोड़ से अधिक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन कमाया है। शोधकर्ताओं का तर्क है कि बैंक अपने इसी मुनाफे का एक हिस्सा UPI इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव में लगा सकते हैं, क्योंकि UPI आज एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा बन चुका है।

प्रस्तावित नया स्ट्रक्चर

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि 0.08% की फीस को केवल उन व्यापारियों पर लगाया जाए जिनका सालाना टर्नओवर ₹50 करोड़ से अधिक है। इस स्ट्रक्चर में 0.06% हिस्सा थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स के लिए और 0.02% पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए प्रस्तावित है। छोटे ट्रांजेक्शन और छोटे व्यापारियों को इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखने की सलाह दी गई है ताकि डिजिटल पेमेंट की रफ्तार बनी रहे।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

मार्केट एक्सपर्ट्स इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि अगर 0.4% MDR लागू होता है, तो क्या मर्चेंट इसका खर्च ग्राहकों पर डालेंगे? इससे रिटेल महंगाई या ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है। वहीं, अगर रेगुलेटर द्वारा फीस को कम किया जाता है, तो बैंकों और फिनटेक कंपनियों की संभावित कमाई पर असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें Reserve Bank of India और NPCI के अगले आधिकारिक बयान पर हैं कि 15 अक्टूबर की डेडलाइन से पहले वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.