इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) ने GIFT City के लिए एक नया और एकीकृत मार्केट एब्यूज फ्रेमवर्क जारी किया है। यह बदलाव SEBI के पुराने नियमों की जगह लेगा और मार्केट में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए **$25,000** से ज्यादा के ट्रेड पर अनिवार्य डिस्क्लोजर लागू करेगा।
नियम क्यों बदले गए?
IFSCA ने अपनी नई 'Prohibition of Market Abuse in Securities Markets Regulations, 2026' पेश की है, जो सितंबर 2026 से प्रभावी होंगी। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य GIFT City को एक ग्लोबल हब बनाना है। अब तक यहाँ लागू SEBI की 2015 की इनसाइडर ट्रेडिंग और 2003 की फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज (FUTP) गाइडलाइंस को पूरी तरह से नए और आधुनिक नियमों से बदल दिया जाएगा।
डिस्क्लोजर और कंट्रोल पर फोकस
अब कंपनियों के डायरेक्टर्स और कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर्स पर जवाबदेही बढ़ गई है। अगर कोई भी व्यक्ति $25,000 से ज्यादा का ट्रेड करता है, तो उसे 2 ट्रेडिंग दिनों के भीतर इसकी जानकारी देनी होगी। सिर्फ रिपोर्टिंग ही नहीं, कंपनियों को अपने इंटरनल कंट्रोल सिस्टम को भी पूरी तरह से अपडेट करना होगा ताकि सेंसिटिव जानकारी लीक न हो और इनसाइडर ट्रेडिंग पर लगाम लगाई जा सके।
हेरफेर (Manipulation) पर लगाम
नए रेगुलेशन में सर्कुलर ट्रेडिंग, आर्टिफिशियल प्राइस मैनिपुलेशन और गलत जानकारी फैलाने जैसी हरकतों पर सख्ती दिखाई गई है। खास तौर पर 'ऑर्डर बुक स्टफिंग' (Order Book Stuffing) जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी हथकंडों को बैन कर दिया गया है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर IFSCA के पास भारी जुर्माना लगाने, चेतावनी देने या सीधे रजिस्ट्रेशन रद्द करने तक की ताकत होगी।
यह बदलाव भले ही शुरुआती दौर में कंपनियों के लिए कंप्लायंस का बोझ बढ़ाए, लेकिन इसका मकसद ग्लोबल इन्वेस्टर्स का भरोसा जीतना है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के फाइनेंशियल हब की छवि और मजबूत हो सके।
