IFSCA ने GIFT City में काम करने वाले पेमेंट ऑपरेटर्स के लिए नेट-वर्थ के कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब TReDS प्लेटफॉर्म्स को **$1 मिलियन** और LEI जारी करने वालों को **$200,000** की नेट-वर्थ बरकरार रखनी होगी। मौजूदा कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए **6 महीने** का समय दिया गया है।
नियम क्यों बदले गए?
IFSCA ने GIFT इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर में काम करने वाली कंपनियों के लिए पारदर्शिता और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बढ़ाने के उद्देश्य से ये नए निर्देश जारी किए हैं। पहले के नियम काफी अस्पष्ट थे, जिन्हें अब स्पष्ट वित्तीय मानकों (Fiscal Thresholds) में बदल दिया गया है ताकि ये कंपनियां किसी भी तरह के रिस्क को बेहतर ढंग से संभाल सकें।
क्या हैं नए नियम?
नए सर्कुलर के तहत:
- TReDS ऑपरेटर्स: न्यूनतम नेट-वर्थ $1 मिलियन होनी चाहिए।
- LEI जारी करने वाली कंपनियां: न्यूनतम नेट-वर्थ $200,000 तय की गई है।
- ट्रेड रिपॉजिटरीज: इनकी न्यूनतम कैपिटल इनके सालाना ऑपरेटिंग खर्चों से जुड़ी होगी, जिसकी समीक्षा हर 6 महीने में की जाएगी।
अनुपालन (Compliance) और डेडलाइन
रेगुलेटर ने मौजूदा ऑपरेटरों को अपने बैलेंस शीट को व्यवस्थित करने के लिए 6 महीने का ग्रेस पीरियड दिया है। इसके बाद, कंपनियों को हर साल 30 सितंबर तक स्टैच्यूटरी ऑडिटर सर्टिफिकेट जमा करना होगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे इन मानकों का पालन कर रही हैं। नियमों को नजरअंदाज करने पर 'Payment and Settlement Systems Act' के तहत दंड का प्रावधान है।
छोटी कंपनियों के लिए क्या है राहत?
हालांकि ये नियम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स जैसे Clearing Corporation of India Ltd के लिए कड़े हैं, लेकिन छोटी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों के लिए राहत बरकरार है। वे IFSCA (Payment Services) Regulations, 2024 के तहत काम करती रहेंगी, जहाँ नेट-वर्थ की सीमा अभी भी $100,000 ही है। इस तरह का अंतर रेगुलेटर ने इसलिए रखा है ताकि क्रिटिकल सिस्टम्स की मजबूती बनी रहे और छोटी कंपनियों के लिए GIFT City का द्वार खुला रहे।
