IFSCA ने 27 अगस्त, 2026 को एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसका मकसद GIFT City में ग्लोबल Exchange Traded Funds (ETFs) की लिस्टिंग को आसान बनाना है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय ETFs सीधे India INX और NSE IFSC जैसे एक्सचेंजों पर ट्रेड कर सकेंगे, जिससे निवेशकों को बिना जटिल स्ट्रक्चर के ग्लोबल प्रोडक्ट्स तक पहुंच मिलेगी।
27 अगस्त, 2026 को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) ने एक नई योजना का खाका पेश किया है, जो ग्लोबल ETFs के लिए GIFT City के दरवाजे खोल देगा। अब जो फंड्स पहले से ही न्यूयॉर्क या लंदन जैसे बड़े बाजारों में लिस्ट हैं, वे सीधे तौर पर India INX और NSE IFSC पर ट्रेड कर सकेंगे। इस रेगुलेटरी बदलाव का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल एसेट मैनेजर्स के लिए उन जटिल और महंगे फंड स्ट्रक्चर्स की अनिवार्यता को खत्म करना है, जिनमें अभी काफी वक्त और पैसा खर्च होता है।
ग्लोबल मैनेजर्स के लिए राह हुई आसान
फिलहाल, किसी ग्लोबल फंड को भारतीय इकोसिस्टम में लाने के लिए एक नया व्हीकल तैयार करना पड़ता है, जो एक लंबा और खर्चीला प्रोसेस है। नए फ्रेमवर्क के तहत, यदि कोई ETF किसी मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज पर पहले से ही लिस्टेड है, तो वह अपने मौजूदा परफॉर्मेंस डेटा और नेट एसेट वैल्यू (NAV) के आधार पर GIFT City में लिस्ट हो सकेगा। इससे उन ग्लोबल फर्म्स को बड़ी राहत मिलेगी जो वेस्टर्न मार्केट्स में पहले से सक्रिय हैं और अपने प्रोडक्ट्स को अब भारतीय निवेशकों और NRIs तक आसानी से पहुंचाना चाहती हैं।
GIFT City की ग्लोबल महत्वाकांक्षा
GIFT City को सिंगापुर और हांगकांग जैसे प्रमुख ग्लोबल फाइनेंशियल हब की तर्ज पर तैयार करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। लाइसेंसिंग की बाधाओं को कम करने से न केवल ग्लोबल एसेट मैनेजर्स आकर्षित होंगे, बल्कि भारतीय बाजार में भी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स की उपलब्धता तेजी से बढ़ेगी।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना होगा?
इस योजना की सफलता काफी हद तक मार्केट लिक्विडिटी पर निर्भर करेगी—यानी स्थानीय एक्सचेंजों पर पर्याप्त खरीदार और विक्रेता होने चाहिए। साथ ही, ग्लोबल एसेट मैनेजर्स को भारतीय रेगुलेटर्स के अनुपालन मानकों (Compliance Standards) के साथ तालमेल बिठाना होगा। निवेशकों को यह समझना होगा कि ये ग्लोबल ETFs अपने साथ मार्केट और करेंसी रिस्क भी लेकर आते हैं। फिलहाल यह प्रस्ताव अभी कंसल्टेशन फेज में है, और अंतिम नियमों के आने के बाद ही इसकी वास्तविक समय-सीमा साफ हो पाएगी।
