ICAI ने ESG रिपोर्टिंग के लिए पेश किया SSA 5000 स्टैंडर्ड, FY28 से होगा लागू

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ICAI ने ESG रिपोर्टिंग के लिए पेश किया SSA 5000 स्टैंडर्ड, FY28 से होगा लागू

ICAI ने सस्टेनेबिलिटी डिस्क्लोजर की ऑडिटिंग के लिए नया स्टैंडर्ड SSA 5000 लॉन्च किया है। यह **1 अप्रैल, 2027** से प्रभावी होगा, जिसका उद्देश्य ESG डेटा की विश्वसनीयता को ग्लोबल मानकों के अनुरूप बनाना है।

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने कंपनियों द्वारा अपनी सस्टेनेबिलिटी डेटा रिपोर्टिंग के तरीके को मानकीकृत (Standardize) करने के लिए एक नया फ्रेमवर्क 'SSA 5000' तैयार किया है। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल, 2027 या उसके बाद शुरू होने वाले फाइनेंशियल ईयर से लागू हो जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय रिपोर्टिंग मानकों को इंटरनेशनल ऑडिटिंग एंड एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स बोर्ड के ग्लोबल बेंचमार्क के बराबर लाना है।

मौजूदा नियमों में बदलाव

SSA 5000 के लागू होते ही, वर्तमान में चल रहे फ्रेमवर्क SSAE 3000 और SAE 3410 को रिटायर कर दिया जाएगा। यह नया सिस्टम 'प्रिंसिपल-बेस्ड' है, जिसका अर्थ है कि यह ऑडिटर्स को किसी एक कठोर फॉर्मेट तक सीमित नहीं रखता। इससे ऑडिटर्स कार्बन एमिशन से लेकर सोशल गवर्नेंस मैट्रिक्स तक, सभी तरह के डेटा पर समान स्तर की बारीकी और पारदर्शिता के साथ काम कर सकेंगे।

निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?

भले ही यह बदलाव किसी कंपनी के शॉर्ट-टर्म मुनाफे को प्रभावित न करे, लेकिन यह लॉन्ग-टर्म कॉर्पोरेट रिस्क असेसमेंट के लिए गेम-चेंजर है। आज के दौर में संस्थागत लेंडर और रेगुलेटर ESG फैक्टर्स को बहुत गंभीरता से देख रहे हैं।

जिन लिस्टेड कंपनियों की सप्लाई चेन जटिल है, उन्हें अब अपने इंटरनल डॉक्यूमेंटेशन और कंट्रोल सिस्टम को अपग्रेड करना होगा। इस बदलाव से कंप्लायंस का काम बढ़ सकता है, लेकिन डेटा क्वालिटी में सुधार आने से सस्टेनेबिलिटी दावों पर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। कंपनियों के पास इन नए नियमों के साथ तालमेल बिठाने के लिए अभी करीब 2 साल का वक्त है, ताकि वे अपने सिस्टम को दुरुस्त कर सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.