IBBI ने दिवाला प्रक्रिया (Insolvency process) में बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब पूरी कंपनी के बजाय इंडिविजुअल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को अलग से सुलझाया जा सकेगा। इस कदम से **1,00,000** से ज्यादा घर खरीदारों को उम्मीद बंधी है और अटके हुए प्रोजेक्ट्स में तेजी आने की संभावना है।
प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक रिजॉल्यूशन का नया दौर
IBBI ने रियल एस्टेट सेक्टर की सबसे बड़ी समस्या यानी 'प्रोजेक्ट्स के अटकने' को हल करने के लिए ये नियम पेश किए हैं। पहले जब कोई डेवलपर बैंकप्ट (Bankrupt) होता था, तो पूरी कंपनी की प्रोसेस शुरू हो जाती थी, जिससे स्वस्थ प्रोजेक्ट्स भी बंद हो जाते थे। अब 66% वोटिंग शेयर वाले लेनदार (Creditors) किसी खास प्रोजेक्ट को बाकी कंपनी से अलग (Ring-fencing) करने का फैसला ले सकेंगे। इससे अच्छे प्रोजेक्ट्स बिना रुकावट पूरे हो सकेंगे।
ऑडिट और पारदर्शिता पर जोर
नियमों के मुताबिक, किसी भी प्रोजेक्ट की बोली लगाने से पहले रेजोल्यूशन प्रोफेशनल को स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट देनी होगी। इसमें कंस्ट्रक्शन का स्टेटस, लागत और सरकारी मंजूरी की जानकारी अनिवार्य होगी। साथ ही, सारा फंड अब RERA प्रोटोकॉल के तहत मैनेज किया जाएगा ताकि पैसा इधर-उधर न हो सके।
घर खरीदारों की भूमिका
अब घर खरीदार भी कानूनी रूप से मजबूत हुए हैं। उन्हें 'प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग कमिटी' में जगह दी जाएगी, जिससे उन्हें सीधे तौर पर यह पता रहेगा कि काम कितनी तेजी से हो रहा है और समाधान योजना (Resolution Plan) कैसे लागू की जा रही है। इससे पजेशन (Possession) पाने में आने वाली कानूनी अड़चनें भी कम होंगी।
निवेशकों के लिए संकेत
यह कदम बैंकिंग सेक्टर के लिए भी अच्छा है क्योंकि अटके हुए प्रोजेक्ट्स जल्द पूरे होने से बैंकों और NBFCs का फंसा हुआ पैसा (Loan) जल्दी रिकवर हो पाएगा। वर्तमान में देश भर में 221 इंसोल्वेंसी केस लंबित हैं, जिन पर अब निवेशकों की नजर है कि कैसे ये नए नियम काम को रफ्तार देते हैं।
