Insurance Brokers Association of India (IBAI) ने IRDAI से नए बीमा सुधार प्रस्तावों की समीक्षा के लिए और समय की मांग की है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित कमीशन कैप्स से कारोबार ठप हो सकता है और करीब 10 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
बीमा क्षेत्र में बदलाव की तैयारी के बीच Insurance Brokers Association of India (IBAI) ने नियामक से 'Recalibrating Economics of Insurance Distribution' पर आए कंसल्टेशन पेपर की समीक्षा के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। एसोसिएशन चाहती है कि फीडबैक देने की आखिरी तारीख, जो फिलहाल 25 अक्टूबर 2026 है, उसे दिसंबर तक बढ़ाया जाए।
क्यों चिंतित है इंडस्ट्री?
मुख्य विवाद का विषय इंश्योरेंस कमीशन पर प्रस्तावित सीमा और Expense of Management (EoM) में कटौती है। ब्रोकरों का मानना है कि यदि कमीशन पर कठोर कैप लगाए गए, तो इससे 2023 के बाद आई सुधार की गति रुक सकती है। छोटे और ग्रामीण स्तर की पॉलिसियों के लिए मौजूदा बिजनेस मॉडल बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि उनकी सर्विसिंग कॉस्ट काफी अधिक होती है।
नौकरियों पर सीधा असर
IBAI ने स्पष्ट किया है कि यदि ये नियम लागू होते हैं, तो अगले 5 वर्षों में करीब 10 लाख लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसका असर टीयर-II और टीयर-III शहरों में बीमा पहुंच बढ़ाने की कोशिशों पर भी पड़ेगा।
बाजार की हलचल
इन खबरों का असर लिस्टेड कंपनियों पर भी दिख रहा है। PB Fintech जैसे शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिली है, क्योंकि बाजार इस रेगुलेटरी बदलाव को लेकर काफी संवेदनशील है।
एसोसिएशन ने अब इस मामले को वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) तक पहुंचा दिया है और किसी भी अंतिम फैसले से पहले एक पारदर्शी इम्पैक्ट असेसमेंट (Impact Assessment) की मांग की है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या नियामक इस समय सीमा को बढ़ाता है या नहीं।
