🚨 सरकारी फरमान: HFC होगी बंद, BSE से De-list होंगे शेयर
यह फैसला HFC के लिए एक बड़े अंत की शुरुआत है। कंपनी के बोर्ड ने स्टेट गवर्नमेंट को साफ तौर पर कहा है कि कंपनी को वाइंड-अप (Winding-up) और लिक्विडेट (Liquidate) कर देना चाहिए। यह सिफारिश सेक्शन 45 ऑफ SFCs एक्ट, 1951 के तहत की गई है। इस सिफारिश पर कार्रवाई करते हुए, स्टेट गवर्नमेंट ने HFC के शेयरों को BSE से डीलिस्ट करने का निर्णय लिया है, और यह प्रक्रिया फिलहाल चल रही है।
📉 माली हालत डांवाडोल: भारी नुकसान की रिपोर्ट
इन सब फैसलों के पीछे कंपनी की बेहद खराब माली हालत जिम्मेदार है। HFC ने दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में ₹0.33 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि में हुए ₹0.51 करोड़ के प्रॉफिट के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है।
नौ महीनों (9M FY26) के दौरान भी कंपनी को ₹2.43 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹0.64 करोड़ का प्रॉफिट था। तिमाही में कुल इनकम (Total Income) घटकर ₹10.53 करोड़ रह गई, जो पिछले साल ₹11.65 करोड़ थी। वहीं, नौ महीनों में इनकम भले ही बढ़कर ₹40.54 करोड़ हो गई, लेकिन खर्चों में भारी इजाफा हुआ और वे बढ़कर ₹45.95 करोड़ पहुंच गए, जिससे नुकसान और बढ़ गया। पिछली साल नौ महीनों में इनकम ₹5.65 करोड़ और खर्चे ₹2.84 करोड़ थे।
❓ ऑडिटर की चिंता: 'गोइंग कंसर्न' पर सवाल
कंपनी की वित्तीय स्थिति इतनी डांवाडोल है कि ऑडिटर (Auditor) प्रेम रविंदर एंड कंपनी ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी का भविष्य अनिश्चित (Material Uncertainty) है और इसके 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी चलते रहने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, ऑडिटर की राय पर कोई बड़ा संशोधन (Unmodified Opinion) नहीं है। तिमाही के लिए बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) ₹(0.02) रहा।
🚩 निवेशकों के लिए आगे क्या?
आगे चलकर HFC से किसी ग्रोथ या नए डेवलपमेंट की उम्मीद नहीं है। अब सारा फोकस कंपनी को व्यवस्थित तरीके से बंद करने और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने पर रहेगा। शेयरधारकों के लिए इसका मतलब है कि उनके शेयर अब सार्वजनिक बाजार में किसी काम के नहीं रहेंगे, क्योंकि कंपनी का अस्तित्व ही समाप्त होने वाला है।