Gujarat State Consumer Disputes Redressal Commission ने IPO आवेदन में हुई क्लर्कल गलती के लिए बैंक को दोषी माना है। बैंक को सर्विस में कमी के चलते **₹37,000** का हर्जाना भरने का आदेश दिया गया है।
क्या था मामला?
अहमदाबाद की एक निवेशक ने बैंक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि बैंक की क्लर्कल गलती के कारण 130 शेयरों के लिए किया गया आवेदन केवल 65 शेयरों के लिए प्रोसेस हुआ। कमीशन ने माना कि बैंक डेटा एक्यूरेसी (Data Accuracy) बनाए रखने में विफल रहा और बैंक को अपनी सर्विस में कमी के लिए जवाबदेह ठहराया।
बैंक की दलील और कमीशन का रुख
बैंक ने अपनी सफाई में कहा था कि IPO आवेदन शेयर ट्रेडिंग से जुड़े हैं, जो कमर्शियल नेचर के होते हैं और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के दायरे से बाहर हैं। हालांकि, कमीशन ने इस तर्क को खारिज कर दिया। आयोग ने साफ किया कि बैंक की तरफ से हुई डेटा-एंट्री की गलती के लिए ग्राहक के कंज्यूमर अधिकार खत्म नहीं होते।
मुआवजे पर स्पष्ट फैसला
निवेशक ने बैंक से ₹40 लाख के मुआवजे की मांग की थी, यह तर्क देते हुए कि कम शेयर अलॉट होने से उन्हें बड़ा नुकसान हुआ। कमीशन ने इसे नामंजूर कर दिया। आयोग ने कहा कि IPO में अलॉटमेंट मार्केट डिमांड और सब्सक्रिप्शन रेश्यो पर आधारित होता है। यह साबित करना मुश्किल है कि पूरा आवेदन होने पर निवेशक को निश्चित रूप से 130 शेयर ही मिलते, इसलिए यह नुकसान केवल अनुमानित (Speculative) है।
रिटेल निवेशकों के लिए सीख
यह फैसला निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी भी है। हालांकि, बैंक की प्रशासनिक गलती के लिए आप कानूनी सहारा ले सकते हैं, लेकिन नुकसान के बड़े दावों के लिए पुख्ता सबूत जरूरी हैं। अपने IPO आवेदन की डिजिटल या फिजिकल रसीद संभाल कर रखें, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद के समय आप अपनी बात मजबूती से रख सकें।
