भारत सरकार ने चालू फाइनेंशियल ईयर के **₹80,000 करोड़** के विनिवेश (Divestment) लक्ष्य का **78%** हिस्सा महज पांच महीनों में ही हासिल कर लिया है। अब सबकी निगाहें IDBI Bank की संभावित बिक्री पर टिकी हैं, जिसके चलते बैंक के शेयर लगभग **7%** उछल गए हैं।
केंद्र सरकार ने अपने फाइनेंशियल ईयर के विनिवेश कार्यक्रम में तेजी दिखाते हुए अब तक ₹62,124 करोड़ जुटा लिए हैं। यह राशि ₹80,000 करोड़ के सालाना लक्ष्य का 78% है। इस फंड के जरिए सरकार अपना फिस्कल डेफिसिट 4.3% के दायरे में रखने की कोशिश कर रही है, ताकि फर्टिलाइजर और एनर्जी जैसे जरूरी इंपोर्ट्स के बढ़ते खर्चों को मैनेज किया जा सके।
प्रमुख योगदानकर्ता (Major Contributors)
इस फंड का बड़ा हिस्सा प्रमुख सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर आया है। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) में 6.5% हिस्सेदारी बिक्री से सरकार को ₹31,515 करोड़ मिले। इसके अलावा, Coal India में 2% हिस्सेदारी से ₹5,542 करोड़ और NHPC में 6.01% हिस्सेदारी बेचकर ₹4,357 करोड़ का कलेक्शन हुआ है।
IDBI Bank की रणनीतिक बिक्री
विनिवेश के शुरुआती लक्ष्य के करीब पहुंचने के बाद अब सरकार का पूरा फोकस IDBI Bank की स्ट्रैटेजिक सेल पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Prem Watsa की कंपनी Fairfax Financial Holdings इस बैंक में 60.72% हिस्सेदारी खरीदने की रेस में सबसे आगे है। इस डील के लिए RBI की गाइडलाइन्स के मुताबिक, खरीदार को अपने मौजूदा CSB Bank और IDBI Bank के विलय के लिए 2 साल की मोहलत मिल सकती है। इस खबर के बाद IDBI Bank के शेयर करीब 6.89% ऊपर कारोबार कर रहे हैं।
जोखिम और नजर रखने वाली बातें
निवेशकों को यह समझना होगा कि IDBI Bank की डील अभी फाइनल नहीं हुई है। इसे मंत्रियों की समिति, RBI और SEBI से मंजूरी मिलना बाकी है। बाजार के जानकारों के मुताबिक, अभी इसमें एग्जीक्यूशन रिस्क बरकरार है। आने वाले समय में डील की शर्तों और ग्लोबल मार्केट की चाल पर निवेशकों को पैनी नजर रखनी चाहिए।
