Digital Gold Regulation: ₹25,000 करोड़ के डिजिटल गोल्ड मार्केट पर सरकार की नजर, RBI और SEBI बनाएंगे कड़े नियम

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AuthorNeha Patil|Published at:
Digital Gold Regulation: ₹25,000 करोड़ के डिजिटल गोल्ड मार्केट पर सरकार की नजर, RBI और SEBI बनाएंगे कड़े नियम

भारत सरकार अब **$3 बिलियन** (करीब **₹25,000 करोड़**) के डिजिटल गोल्ड सेक्टर को रेगुलेट करने की तैयारी कर रही है। RBI और SEBI की निगरानी में आने वाले इस नए फ्रेमवर्क का मकसद रिटेल निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाना और हर यूनिट के पीछे फिजिकल गोल्ड की गारंटी सुनिश्चित करना है।

नियम क्यों जरूरी हैं?

सरकार अब डिजिटल गोल्ड को 'सिक्योरिटी' के तौर पर क्लासिफाई करने की योजना बना रही है। इसके तहत इसे Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के दायरे में लाया जाएगा। अभी तक इस सेक्टर में सबसे बड़ा रिस्क 'अनएलोकेटेड गोल्ड' (Unallocated Gold) का है। कई प्लेटफॉर्म्स पर निवेशक गोल्ड के टुकड़े तो खरीद लेते हैं, लेकिन वह सोना उनके नाम पर अलग से वॉल्ट में नहीं रखा जाता। कंपनी के पास गोल्ड का एक कॉमन पूल होता है, और अगर कंपनी डिफॉल्ट करती है, तो निवेशक का पैसा फंसने का खतरा रहता है।

कैसे बदलेगा मार्केट का मिजाज?

SEBI पहले भी स्टॉक ब्रोकर्स को डिजिटल गोल्ड बेचने से सावधान कर चुका है क्योंकि यह रेगुलेटेड फ्रेमवर्क का हिस्सा नहीं था। आने वाले नियमों के बाद, डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स को Gold ETFs और Sovereign Gold Bonds (SGBs) की तर्ज पर काम करना होगा। इसका मतलब यह है कि प्लेटफॉर्म्स को हर बेची गई यूनिट के बदले फिजिकल गोल्ड को सुरक्षित वॉल्ट में रखना होगा, जिसका ऑडिट इंडिपेंडेंट कस्टोडियंस करेंगे।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

जो निवेशक महज ₹100 जैसे छोटे अमाउंट से डिजिटल गोल्ड में निवेश करते हैं, उन्हें अब ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। इंडस्ट्री के बड़े प्लेयर्स ने भी खुद को रेगुलेट करने के लिए 'डिजिटल प्रेशियस मेटल्स एश्योरेंस काउंसिल ऑफ इंडिया' जैसी संस्थाएं बनाई हैं। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार मौजूदा होल्डिंग्स को नए ऑडिट नियमों में कैसे शिफ्ट करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.