1 नवंबर, 2026 से Finance Ministry GST नियमों को सरल बना रही है। अब पोस्ट-सेल डिस्काउंट और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़े रिफंड तेजी से मिलेंगे, जिससे FMCG और रिटेल सेक्टर की कंपनियों का वर्किंग कैपिटल फ्री होगा।
वित्त मंत्रालय ने Goods and Services Tax (GST) ढांचे में बड़े बदलावों का ऐलान किया है, जो 1 नवंबर, 2026 से लागू होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनियों पर प्रशासनिक बोझ को कम करना और कैश फ्लो (Cash Flow) में सुधार लाना है।
डिस्काउंट और क्रेडिट नोट के नए नियम
अब तक कंपनियों को सेल के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट के लिए सख्त नियमों का पालन करना पड़ता था, जिसमें पहले से एग्रीमेंट होना जरूरी था। अब नए नियमों के तहत, कंपनियां डिस्काउंट के लिए क्रेडिट नोट जारी कर सकेंगी, बस शर्त यह है कि लेने वाले को अपना इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) रिवर्स करना होगा। यह FMCG और फार्मा जैसे सेक्टर्स के लिए बड़ी राहत है, जहां अक्सर परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव दिए जाते हैं।
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर पर बड़ी राहत
सरकार अब इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (जहाँ कच्चे माल पर GST दर, अंतिम उत्पाद से ज्यादा होती है) की समस्या को सुलझाने के लिए CGST एक्ट की धारा 54(6) का विस्तार कर रही है। अब पात्र कंपनियां इन मामलों में 90% तक प्रोविजनल रिफंड तुरंत प्राप्त कर सकेंगी। इससे उन कैपिटल-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज को मदद मिलेगी जिनका पैसा टैक्स रिफंड के चक्कर में फंसा रहता था।
निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि यह राहत भरी खबर है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि ये रिफंड 'रिस्क-आधारित स्क्रूटनी' (Risk-based scrutiny) के अधीन होंगे। यानी ऑडिट की प्रक्रिया जारी रहेगी। आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग, केमिकल और कंज्यूमर सेक्टर की कंपनियों के क्वार्टरली रिजल्ट्स में वर्किंग कैपिटल की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। बेहतर कैश फ्लो का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और कर्ज कम करने की क्षमता पर पड़ेगा।
