GST Council की बैठक **7 अक्टूबर, 2026** को होने जा रही है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए बड़े टैक्स सुधारों पर चर्चा होगी। इस बैठक का मुख्य मकसद कंपनियों की लागत कम करना और कंप्लायंस को आसान बनाना है।
GST 2.0 का एजेंडा
GST काउंसिल की आगामी बैठक को 'GST 2.0' के रूप में देखा जा रहा है। निवेशकों के लिए अच्छी खबर यह है कि सरकार टैक्स दरों में बदलाव के बजाय बिजनेस की लागत घटाने और अनुपालन (Compliance) को सरल बनाने पर जोर दे रही है।
इंफ्रा और कैपिटल कॉस्ट में राहत
काउंसिल का सबसे बड़ा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की पात्रता पर है। फिलहाल, पाइपलाइनों और टेलीकॉम टावरों को अचल संपत्ति (Immovable Property) मानकर उन पर ITC नहीं मिलता, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। यदि इन्हें रीलैक्स किया जाता है, तो पेट्रोकेमिकल, फर्टिलाइजर, गैस डिस्ट्रीब्यूशन और टेलीकॉम कंपनियों की कैश-फ्लो में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को फायदा
होटल और टूरिज्म सेक्टर में अभी होटल रूम्स और कैटरिंग जैसी सेवाओं पर दोहरा टैक्स (Double Taxation) लगता है क्योंकि इनपुट क्रेडिट नहीं मिल पाता। काउंसिल इस पर भी विचार कर रही है कि इन सेवाओं पर ITC का लाभ कैसे दिया जाए, जिससे होटल ऑपरेटर्स और रिसॉर्ट्स के मार्जिन में सुधार हो सके।
नियमों में सख्ती कम, सरलता ज्यादा
काउंसिल लिटिगेशन घटाने के लिए भी कई कदम उठा रही है। एक प्रस्ताव के तहत 'जेन्युइन बायर्स' को सप्लायर की गलती की सजा (Section 16(2)(c)) से बचाने पर चर्चा है। इसके अलावा, गिरफ्तारी से पहले न्यायिक मंजूरी और प्रोसीक्यूशन के लिए मौद्रिक सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि ये अभी केवल सिफारिशें हैं, जिनका अंतिम असर सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही साफ होगा।
