7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली 57वीं GST काउंसिल की बैठक में CGST एक्ट की धारा 17(5) के तहत Input Tax Credit (ITC) के नियमों में ढील देने पर चर्चा होगी। इस फैसले से FMCG और फार्मा सेक्टर को बड़ा फायदा हो सकता है।
7 अक्टूबर, 2026 को आयोजित होने वाली 57वीं GST काउंसिल की बैठक में मुख्य फोकस ऑपरेशनल रिफॉर्म्स और 'ब्लॉक' किए गए Input Tax Credit (ITC) की समीक्षा पर होगा। पिछले कई सालों से कंपनियां उन खर्चों पर GST तो भर रही हैं, लेकिन उन्हें क्लेम नहीं कर पा रही हैं, जिससे बिजनेस की लागत बढ़ रही है।
बिजनेस खर्चों की समीक्षा
CGST एक्ट की धारा 17(5) के तहत अभी कई खर्च 'ब्लॉक क्रेडिट' की सूची में आते हैं, जिनमें मोटर वाहन, निर्माण कार्य और कर्मचारी कल्याण से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। काउंसिल इस बैठक में इन प्रतिबंधों को हटाने पर विचार करेगी ताकि कंपनियों का कैश फ्लो बेहतर हो सके।
विशेष रूप से FMCG और फार्मा सेक्टर ने फ्री प्रोडक्ट सैंपल्स, ग्रुप इंश्योरेंस और आउटडोर कैटरिंग जैसे खर्चों पर राहत की मांग की है। बाजार विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में सैंपल बांटने वाली कंपनियों के लिए GST क्रेडिट न मिलना मार्जिन पर भारी पड़ता है। यदि सरकार इस पर मंजूरी देती है, तो बड़ी कंपनियों का वित्तीय बोझ कम हो सकता है।
राजस्व और अनुपालन का संतुलन
हालांकि उद्योग जगत को उम्मीदें हैं, लेकिन काउंसिल राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी स्थिति से बचना चाहती है। लॉ कमिटी वाहनों के लिए ITC देने में सावधानी बरत रही है, क्योंकि निजी इस्तेमाल के वाहनों को भी बिजनेस खर्च बताकर टैक्स लाभ लेने का जोखिम बना रहता है।
इन सुधारों के अलावा, काउंसिल का लक्ष्य एक ऐसा तकनीकी ढांचा बनाना है जिससे ईमानदार करदाताओं को अपने सप्लायर्स की गलती की सजा न मिले। निवेशकों को 7 अक्टूबर के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इस बैठक में जो बदलाव होंगे, वे कंपनियों के मुनाफे और टैक्स अनुपालन पर सीधा असर डालेंगे।
