GST Council की आगामी बैठक **7 अक्टूबर, 2026** को होने वाली है, जिसमें टैक्स दरों के बदलाव के बजाय प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया जाएगा। रिफंड प्रक्रिया को ऑटोमैटिक बनाने, GCC के लिए टैक्स नियमों में स्पष्टता और छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने जैसे अहम प्रस्तावों पर चर्चा होगी।
प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने की तैयारी
7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली GST Council की बैठक एक अहम नीतिगत बदलाव का संकेत है। इस बार काउंसिल का पूरा ध्यान टैक्स स्लैब में बदलाव के बजाय उन स्ट्रक्चरल बाधाओं को दूर करने पर है जो भारतीय कंपनियों की कामकाज की क्षमता को प्रभावित कर रही हैं। निवेशकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी और कैश फ्लो में सुधार आएगा।
Global Capability Centres (GCC) के लिए टैक्स में राहत
काउंसिल का एक मुख्य एजेंडा GCCs से जुड़ी टैक्स विसंगतियों को दूर करना है। वर्तमान में, विदेशों के लिए किए गए काम पर भी 18% टैक्स लायबिलिटी का डर रहता है क्योंकि उन्हें अक्सर घरेलू ट्रांजैक्शन मान लिया जाता है। अगर इन सेवाओं को एक्सपोर्ट के समान माना जाता है, तो GCCs इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठा सकेंगे और विदेशी आय टैक्स-फ्री हो जाएगी, जिससे आईटी सेक्टर की कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी।
रिफंड प्रक्रिया होगी ऑटोमैटिक
सरकार अब मैन्युअल और अफसर-आधारित रिफंड अप्रूवल के बजाय डेटा-ड्रिवेन ऑटोमेटेड सिस्टम पर शिफ्ट होने की तैयारी कर रही है। एक सिस्टेमैटिक रिस्क-स्कोरिंग मॉडल लागू होने से उन दावों को तुरंत क्लियर किया जा सकेगा जो मौजूदा फाइलिंग डेटा से मेल खाते हैं। इससे वर्किंग कैपिटल की लागत कम होगी और लिक्विडिटी में सुधार आएगा।
ई-कॉमर्स और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत
छोटे विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्यों में कारोबार करना अब आसान हो सकता है। मौजूदा नियमों के तहत हर राज्य में फिजिकल ऑफिस दिखाना एक चुनौती था, लेकिन अब ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों के वेयरहाउस पते को ही रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति मिल सकती है। यह डिजिटल ट्रेड में एंट्री की बाधाओं को कम करेगा और छोटे रिटेलर्स को तेजी से स्केल करने में मदद करेगा।
