GST Council की बैठक 7 अक्टूबर को होने जा रही है। इस बार सरकार का फोकस टैक्स रेट्स बदलने के बजाय प्रशासनिक सुधारों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी दिक्कतों को सुलझाने पर रहेगा।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में टैक्स की दरों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। एक साल से भी ज्यादा समय के बाद हो रही यह बैठक पूरी तरह से प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक सुधारों (Procedural Reforms) पर केंद्रित रहेगी, जिससे मार्केट में टैक्स को लेकर बनी अनिश्चितता कम हो सकती है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की समस्या पर जोर
बैठक का मुख्य मुद्दा ITC से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना है। फिलहाल, कई ईमानदार कंपनियां तब फंस जाती हैं जब उनके सप्लायर सरकार को टैक्स जमा नहीं करते, भले ही खरीदार ने बिल का भुगतान कर दिया हो। इंडस्ट्री लंबे समय से ऐसी सुरक्षा की मांग कर रही है कि सप्लायर की गलती की सजा खरीदार को न मिले। काउंसिल इस पर कोई नया मैकेनिज्म तैयार कर सकती है, जिससे कंपनियों का वर्किंग कैपिटल साइकिल सुधर सके।
रजिस्ट्रेशन और कानूनी मामले
सरकार अब छोटी कंपनियों की तरह बड़ी कंपनियों के लिए भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाना चाहती है। फिलहाल 65% नए रजिस्ट्रेशन आसान हो चुके हैं, और अब लक्ष्य बाकी 35% आवेदकों के लिए भी नियम सरल करने का है। इसके अलावा, जिन बड़ी कंपनियों का टैक्स क्रेडिट ₹2.5 लाख प्रति माह से ज्यादा है, उनके लिए डॉक्यूमेंटेशन को भी स्टैंडर्डाइज किया जाएगा।
इसके साथ ही, ₹2,500 करोड़ के पेंडिंग कंपनसेशन सेस पर भी चर्चा संभव है, जो फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। साथ ही, मोटर व्हीकल, ट्रैवल और हेल्थ सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में ITC पर मिल रही पाबंदियों में ढील देने की मांग पर भी काउंसिल विचार कर सकती है।
