GST Council: अब टैक्स चोरों की खैर नहीं, GSTN और NATGRID को जोड़ने की तैयारी

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AuthorMehul Desai|Published at:
GST Council: अब टैक्स चोरों की खैर नहीं, GSTN और NATGRID को जोड़ने की तैयारी

GST काउंसिल 7 अक्टूबर 2026 को एक अहम बैठक करने जा रही है, जिसमें GSTN को NATGRID के साथ लिंक करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इसका मुख्य मकसद API के जरिए टैक्स चोरी रोकना है, लेकिन डेटा सिक्योरिटी को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

डेटा शेयरिंग का नया दौर

GST काउंसिल की आगामी बैठक में सबसे बड़ा एजेंडा NATGRID (National Intelligence Grid) और GSTN के बीच एक डिजिटल पाइपलाइन बनाने का है। फिलहाल, जांच एजेंसियां मैन्युअल और बिखरे हुए तरीके से डेटा मांगती हैं, लेकिन इस नई व्यवस्था के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सीधे तौर पर जरूरी डेटा एक्सेस कर पाएंगी।

सरकार का मकसद और डेटा का दायरा

टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर फ्रॉड को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही है। इस सिस्टम के जरिए बिजनेस रजिस्ट्रेशन, ई-वे बिल रिकॉर्ड, इनवर्ड-आउटवर्ड सप्लाई लॉग्स और ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन जैसी संवेदनशील जानकारियां सीधे जांच एजेंसियों की पहुंच में होंगी।

प्राइवेसी पर क्यों है बहस?

GSTN के अधिकारियों ने इस पर सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर डेटा का दायरा बहुत ज्यादा बढ़ा दिया गया, तो टैक्सपेयर्स की पूरी हिस्ट्री लीक होने का खतरा बना रहेगा। काउंसिल अब इस पर विचार कर रही है कि एजेंसियों को केवल 'स्पेसिफिक डेटा' ही मिले, न कि पूरा डेटाबेस।

बिजनेस पर क्या होगा असर?

अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो कंपनियों की स्क्रूटनी का तरीका बदल जाएगा। आने वाले समय में ऑटोमेटेड रिस्क-बेस्ड असेसमेंट बढ़ सकते हैं, जिसका मतलब है कि डिजिटल सेक्टर और बड़ी सप्लाई चेन वाली कंपनियों को भविष्य में अधिक ऑडिट या पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है। निवेशकों और बिजनेस लीडर्स को 7 अक्टूबर के फैसलों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि यही तय करेगा कि भविष्य में डेटा सुरक्षा के कितने मजबूत 'गार्डरेल्स' लागू किए जाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.