57वीं GST Council मीटिंग में सरकार ने टैक्स दायरा बढ़ाने के लिए नई टेक्नोलॉजी का दांव खेला है। अब **₹10,000** से कम की राशि के लिए नोटिस नहीं भेजा जाएगा, जिससे छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
हाल ही में संपन्न हुई 57वीं GST Council मीटिंग में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में टैक्स अनुपालन (compliance) पूरी तरह से डेटा-संचालित होगा। सरकार का मुख्य मकसद 1.7 करोड़ GST रजिस्टर्ड करदाताओं के सिस्टम को आसान बनाना और राजस्व की लीकेज को रोकना है।
छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी राहत
अब टैक्स नोटिस को लेकर एक नई सीमा तय कर दी गई है। सरकार ने ₹10,000 का थ्रेशोल्ड फिक्स किया है, जिसका मतलब है कि मामूली दस्तावेजी गलतियों के लिए बार-बार नोटिस नहीं मिलेंगे। यह कदम छोटे कारोबारियों की प्रशासनिक उलझनों को कम करेगा।
फेसलेस एडमिनिस्ट्रेशन की तैयारी
सरकार 2027-28 फाइनेंशियल ईयर तक लगभग 2 लाख मल्टी-ज्यूरिसडिक्शन टैक्सपेयर्स के लिए 'फेसलेस' और सेंट्रलाइज्ड एडमिनिस्ट्रेशन मॉडल लाने की योजना बना रही है। इसका लक्ष्य अलग-अलग राज्यों के बीच टैक्स असेसमेंट में समानता लाना और क्षेत्राधिकार संबंधी विवादों को खत्म करना है।
निवेशकों और बिजनेसमैन के लिए संकेत
सिस्टम के डिजिटलाइजेशन के साथ, सरकार अब B2B और B2C ट्रांजेक्शन पर कड़ी नजर रखेगी। ई-इनवॉइसिंग को बढ़ावा देने से सप्लाई चेन डेटा का पूरा ट्रैक रखा जा सकेगा। वहीं, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम पर सरकार का रुख सख्त बना हुआ है, इसलिए गलतियों से बचने के लिए कंपनियों को अपने इनवॉइस मैचिंग को दुरुस्त रखने की सलाह दी गई है।
