GST काउंसिल अपनी 57वीं बैठक 12 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित करने जा रही है, जिसमें टैक्स रिफॉर्म्स और रेट रेशनलाइजेशन पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
पॉलिसी रिव्यू और मार्केट पर असर
भारत के इनडायरेक्ट टैक्स फ्रेमवर्क के लिए यह बैठक बेहद अहम है। सितंबर 2025 के बड़े बदलाव के बाद, जिसमें 5%, 18% और 40% के रेट स्लैब तय किए गए थे, अब काउंसिल इस बात का जायजा लेगी कि क्या इनका फायदा वास्तव में आम ग्राहकों तक पहुंच रहा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के डेटा से पता चला है कि कुछ सेक्टर्स जैसे दवाइयों और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में टैक्स कटौती के बावजूद कीमतों में गिरावट नहीं आई है।
मोबाइल फोन पर टैक्स कटौती की चर्चा
बाजार में इस बात की चर्चा तेज है कि मोबाइल फोन पर लगने वाले 18% GST को कम किया जा सकता है। पिछली बार के रेट कट्स में इसे नहीं छुआ गया था। एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर यह फैसला लिया जाता है, तो इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में डिमांड बढ़ सकती है, बशर्ते कंपनियां इस राहत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाएं।
इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और कानूनी पेंच
रेट के अलावा, बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) कंप्लायंस पर भी मंथन होगा। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के बाद ईमानदार टैक्सपेयर्स की सुरक्षा के लिए नए और बेहतर नियमों की मांग उठ रही है। काउंसिल का लक्ष्य प्रशासनिक बोझ को कम करना और एक ऐसा सिस्टम बनाना है, जिससे टैक्स विवाद कम हों और व्यापार करना आसान हो जाए।
