GST Council अब कैपिटल गुड्स पर चुकाए गए टैक्स को लेकर एक नए नियम पर विचार कर रही है, जिससे कंपनियों को सीधे कैश रिफंड मिल सकेगा।
GST Council एक बड़े नीतिगत बदलाव पर काम कर रही है, जो मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। मौजूदा सिस्टम में, कैपिटल गुड्स (मशीनरी) की खरीद पर चुकाया गया GST 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (ITC) के रूप में अटक जाता है, जिसका इस्तेमाल केवल भविष्य की टैक्स देनदारियों को कम करने के लिए किया जा सकता है। इससे खासकर भारी निवेश वाले सेक्टरों का पैसा सालों तक ब्लॉक रहता है।
किन सेक्टरों को होगा फायदा?
इस बदलाव का सीधा असर रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मैन्युफैक्चरिंग और टेक्सटाइल जैसे उद्योगों पर पड़ेगा। इन सेक्टरों में शुरुआती लागत बहुत ज्यादा होती है। अगर कंपनियों को इस टैक्स का एक हिस्सा कैश रिफंड के तौर पर वापस मिल जाता है, तो इस लिक्विडिटी का इस्तेमाल बिजनेस विस्तार के लिए किया जा सकेगा, जिससे उनकी कैश फ्लो स्थिति में सुधार आएगा।
सरकारी खजाने और चुनौतियां
हालांकि, यह बदलाव सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती भी है। चूंकि GST रेवेन्यू केंद्र और राज्यों के बीच साझा होता है, इसलिए कैश रिफंड से सरकारी बजट पर असर पड़ सकता है। इसे देखते हुए सरकार इसे पूरी तरह लागू करने के बजाय एक 'रिस्क-बेस्ड' अप्रोच अपनाने की योजना बना रही है ताकि राज्यों के वित्त पर अचानक बोझ न पड़े।
ऑटोमेशन पर जोर
रिफंड के अलावा, टैक्स प्रशासन को मॉडर्न बनाने की भी तैयारी है। 7 अक्टूबर को होने वाली अगली मीटिंग में ITC रिफंड के लिए एक ऑटोमेटेड सिस्टम पर चर्चा होगी। सरकार का लक्ष्य तकनीक के जरिए करीब 90% दावों को बिना मैन्युअल वेरिफिकेशन के मंजूरी देना है, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी और बिजनेस में तेजी आएगी। निवेशक इस मीटिंग के नतीजों पर बारीक नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि कंपनियों को इसका कितना सीधा लाभ मिलेगा।
