GST Council ने ई-कॉमर्स सेलर्स के लिए नियमों को आसान बनाने का ऐलान किया है। 1 नवंबर, 2026 से लागू होने वाले इन बदलावों का सीधा फायदा करीब 9.5 लाख छोटे व्यापारियों को मिलेगा, जिसमें रजिस्ट्रेशन से लेकर रिफंड तक की प्रक्रिया सरल होगी।
व्यापार को मिलेगी रफ्तार
GST काउंसिल ने छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं पर अनुपालन (compliance) का बोझ कम करने के लिए बड़े सुधारों को अंतिम रूप दे दिया है। सबसे बड़ा बदलाव स्टेट-लेवल रजिस्ट्रेशन को लेकर है। अब सेलर्स को हर राज्य में फिजिकल ऑफिस खोलने की जरूरत नहीं होगी; वे ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को ही 'प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस' के रूप में इस्तेमाल कर सकेंगे। यह कदम छोटे रिटेलर्स के लिए नेशनल मार्केट के दरवाजे खोल देगा।
पोर्टल और रिफंड में बदलाव
GST पोर्टल के रजिस्ट्रेशन फॉर्म (GST REG-01) को भी अपग्रेड किया जा रहा है, जिसमें अब ड्रॉप-डाउन मेन्यू और टूल-टिप्स होंगे, जिससे गलतियों की गुंजाइश कम होगी। रिफंड मैनेजमेंट के लिए सरकार ऑटोमेटेड सिस्टम ला रही है, जिससे बिना किसी मैनुअल दखल के पैसा सीधे खाते में आ सकेगा। रिफंड एप्लिकेशन के लिए डिफिशिएंसी मेमो की समय सीमा को 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है।
छोटे विवादों से मुक्ति
सरकार ने टैक्स विवादों को कम करने के लिए एक 'डी मिनिमिस' थ्रेशोल्ड तय किया है। अब टैक्स अधिकारी केवल ₹10,000 से अधिक की विसंगतियों पर ही शो-कॉज नोटिस भेजेंगे। इससे छोटे-मोटे टैक्स विवादों में कमी आएगी।
इन सुधारों का पहला चरण 1 नवंबर, 2026 से शुरू होगा, जबकि कुछ कानूनी संशोधन अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सेलर्स की संख्या में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।
