GST Council ने टैक्स विवादों में गिरफ्तारी से जुड़ी Section 69 को खत्म करने की सिफारिश की है। साथ ही, क्रिमिनल प्रोसीक्यूशन की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है, ताकि व्यापारियों को बड़ी राहत मिल सके।
टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को और अधिक 'ट्रस्ट-बेस्ड' बनाने की दिशा में GST काउंसिल ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 57वीं GST काउंसिल की बैठक में यह फैसला लिया गया कि CGST एक्ट की धारा (Section) 69 को हटा दिया जाए, जिसके तहत अब तक टैक्स अधिकारियों के पास गिरफ्तारी करने का अधिकार था। सरकार अब जबरन वसूली या गिरफ्तारी के बजाय डेटा-आधारित कंप्लायंस पर जोर दे रही है।
कंप्लायंस का बोझ हुआ कम
गिरफ्तारी के प्रावधान को हटाने के साथ ही काउंसिल ने क्रिमिनल प्रोसीक्यूशन की मॉनेटरी लिमिट को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया है। इसका मतलब है कि अब छोटे और तकनीकी विवादों के लिए कानूनी पचड़ों में पड़ने की जरूरत नहीं होगी। CBIC ने फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत नई गिरफ्तारियों पर रोक लगा दें। यह व्यवस्था अप्रैल 2027 से पूरी तरह कानूनी रूप से लागू हो जाएगी।
कारोबारियों के लिए क्या हैं मायने?
भारतीय बिजनेस जगत के लिए यह राहत भरी खबर है। अब तक कई बार यह आरोप लगते रहे हैं कि टैक्स ऑडिट के दौरान गिरफ्तारी का डर दिखाकर दबाव बनाया जाता था। सरकार अब फिजिकल कस्टडी की जगह डिजिटल फुटप्रिंट और सर्विलांस पर फोकस करेगी, ताकि गलत तरीके से होने वाली हेराफेरी को पकड़ा जा सके।
क्या अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है?
सावधान रहें, यह छूट सिर्फ GST कानूनों के लिए है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको कानूनी सुरक्षा मिल गई है। अन्य क्रिमिनल या कॉर्पोरेट कानूनों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। अभी पेंडिंग चल रहे पुराने केसों को लेकर सरकार जल्द ही गाइडलाइन्स जारी कर सकती है। सरकार का मुख्य मकसद अब GST पोर्टल के जरिए अडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करना है, ताकि मैनुअल दखलंदाजी कम हो सके।
