GST Council की 57वीं बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) नियमों में बड़े बदलावों को मंजूरी दी गई है। इससे फार्मा, हॉस्पिटैलिटी और कॉर्पोरेट सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी।
राहत और सुधार का नया दौर
GST काउंसिल की 57वीं बैठक में लिए गए फैसलों का मुख्य उद्देश्य 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना और कंपनियों पर टैक्स का बोझ कम करना है। सबसे बड़ा बदलाव इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की पात्रता को लेकर आया है। सरकार अब उन खर्चों पर भी क्रेडिट देगी जो पहले ब्लॉक थे, जिससे 'टैक्स पर टैक्स' (Tax Cascading) की समस्या खत्म होगी और कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट घटेगी।
प्रमुख सेक्टरों को फायदा
1. फार्मा सेक्टर: कंपनियों को अब डॉक्टरों को दिए जाने वाले फ्री मेडिकल सैंपल्स और एक्सपायर्ड दवाइयों को नष्ट करने पर भी ITC मिलेगा। इससे दवा निर्माता कंपनियों का अकाउंटिंग बोझ काफी कम होगा।
2. कॉर्पोरेट एम्प्लॉइज: कंपनियों द्वारा कर्मचारियों के लिए दिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर भी अब ITC का लाभ मिल सकेगा।
3. सर्विस और इंफ्रास्ट्रक्चर: हॉस्पिटैलिटी, कैटरिंग और ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं को अब ITC दायरे में लाया गया है। साथ ही, टेलीकॉम टावर और फैक्ट्री से बाहर मौजूद पाइपलाइनों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी अब टैक्स क्रेडिट मिल पाएगा।
अनुपालन और राहत (Compliance & Relief)
सरकार ने कानूनी पचड़ों को कम करने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं:
- प्रॉसिक्यूशन लिमिट: GST अपराधों के लिए प्रॉसिक्यूशन की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है और GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों को भी खत्म किया गया है।
- फास्ट रिफंड: सरकार ने रिफंड प्रक्रिया को तेज करते हुए अब 90% दावों को मात्र 10 दिन के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा है।
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
हालांकि ये फैसले बिजनेस के लिए बहुत सकारात्मक हैं, लेकिन निवेशकों को सरकारी नोटिफिकेशन का इंतजार करना चाहिए। जब तक नियम विधिवत नोटिफाई नहीं होते, तब तक इनका लाभ नहीं उठाया जा सकेगा। कंपनियों को भी अपने डॉक्यूमेंटेशन पर कड़ी नजर रखनी होगी ताकि बाद में ऑडिट के दौरान किसी विवाद से बचा जा सके।
