GST Council ने CGST Act की धारा 69 में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। अब टैक्स चोरी के मामलों में गिरफ्तारी की सीमा **₹1 करोड़** से बढ़ाकर **₹5 करोड़** कर दी गई है, जिससे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
अब मनमानी गिरफ्तारी पर लगेगी लगाम
GST काउंसिल ने टैक्स एनफोर्समेंट को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। अभी तक CGST एक्ट की धारा 69 के तहत टैक्स अधिकारियों के पास काफी अधिकार थे, जिसमें बिना टैक्स लायबिलिटी तय हुए भी गिरफ्तारी की जा सकती थी। अब सरकार इसे बदलकर न्यायिक प्रक्रिया के अधीन ला रही है।
क्या बदलेगा कारोबारियों के लिए?
अब प्रॉसिक्यूशन (Prosecution) शुरू करने की सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है। इसके अलावा, अनिवार्य 6 महीने की जेल की सजा का प्रावधान भी हटाया जा रहा है, जिससे अदालतों को मामले की गंभीरता के हिसाब से सजा तय करने की आजादी मिलेगी। इससे कॉरपोरेट जगत में व्याप्त 'गिरफ्तारी का डर' काफी हद तक कम होगा और बिजनेस करने में अधिक सुगमता आएगी।
क्या टैक्स चोरी पर सख्ती कम हुई है?
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि यह टैक्स चोरी पर छूट नहीं है। सरकार अभी भी सर्च और सीजर (Search and Seizure) ऑपरेशन जारी रखेगी। इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत फायदा उठाने या सर्कुलर ट्रेडिंग जैसे मामलों में कार्रवाई पहले की तरह ही होगी।
बदलाव केवल 'प्रोसीजर' में है। अब गिरफ्तारी का फैसला पूरी तरह से टैक्स विभाग के हाथ में न होकर न्यायपालिका (Judiciary) के पास होगा। सरकार को अब किसी भी केस को साबित करने के लिए पुख्ता सबूत पेश करने होंगे, जो कोर्ट में टिक सकें। यह कदम हाल के वर्षों में न्यायिक टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है ताकि कानूनी विवादों को पहले ही कम किया जा सके।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि रेवेन्यू डिपार्टमेंट किस तरह अपनी टैक्स वसूली के लक्ष्य और नए 'सबूत-आधारित' प्रॉसिक्यूशन के बीच संतुलन बनाता है।
